फूफी फरहीन के साथ कमुक्त भाग 4

अपने बदन को थोड़ा सा पीछे कर के मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उससे सहलाने लगीं.

उनका हाथ लगते ही मेरा लंड पठार की तरह सख़्त हो गया. मुझे अंदाज़ा हो गया के अपने हाथ में मेरे लंड का अकड़ जाना उन्हे अच्छा लगा है. मेरे लंड पर उनके हाथ का लांस नर्म और मुलायम था. मैंने उनके मुँह में अपनी ज़बान डाल दी जिससे वो फॉरन चूसने लगीं. कुछ देर मेरे लंड पर हाथ फेरने के बाद उन्होने अपनी उंगली और अंगूठे में मेरे लंड का टोपा पकड़ा और उससे आहिस्ता आहिस्ता दबाने लगीं. मेरे लंड से सफ़ेद लैइस्डार पानी की चंद बूँदें निकलीं जिन्हे फूफी फ़रहीन ने अपने अंगूठे से साफ़ कर दिया. उनका बदन गरम था और साफ़ ज़ाहिर था के फूफी फ़रहीन अब फिर चूत मरवाने के लिये तय्यार हो चुकी थीं .

में बड़े जोशीले अंदाज़ में उनके मुँह के बोसे लेता रहा और उनके गालों, आँखों और थोड़ी को चूमता रहा. वो और ज़ियादा गरम होने लगीं और मेरे हाथों ने उनके बदन की गर्मी महसूस की. मुझे पता चल गया था के उनका ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है और साँस तेज़ चलनी शुरू हो गई है. उनका सीना साँस लेते वक़्त ऊपर नीचे हो रहा था. मैंने उनका गिरेबां नीचे खैंचा और सर झुका कर उनके ब्रा में बंद मम्मों के बीच में ज़बान डाल दी. मेरी ज़बान उनके आपस में जुड़े हुए मम्मों के अंदर चली गई और में उन्हे चाटने लगा. वो हंस पड़ीं. शायद उन्हे गुदगुदी हो रही थी.

में उस वक़्त फूफी फ़रहीन के कमरे में उन्हे चोदने नही आया था मगर अब मेरी अपनी हालत भी खराब होने लगी थी. मैंने उन्हे चूमते चूमते उनकी शलवार का नाड़ा टटोला और उस का एक सिरा खैंच कर खोल दिया. नाड़ा खुलते ही उनकी शलवार ढीली हो कर उनके क़दमों में गिर पड़ी. मै उनके पेट पर हाथ फेरता हुआ उनके पीछे आ गया. पहले मैंने अपने कपड़े उतारे और फिर उनके चूतड़ों पर से उनकी क़मीज़ उठाई और उनकी कमर पर दबाव डाल कर उन्हे नीचे झुका दिया. उन्होने कोई बात नही की और बेड के ऊपर अपने दोनो हाथ रख कर झुक गईं. उनकी चूत को अब एक दफ़ा फिर मेरा लंड दरकार था.

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मैंने उनके चूतरों को दोनो हाथों की मदद से खोल कर उनके अंदर उनकी गांड़ के सुराख पर मुँह रख दिया और उससे चाटने लगा. वो उसी लम्हे ऊऊओं ऊऊओं करने लगीं. कुछ देर बाद मैंने उनकी रानों पर हाथ फैरे और फिर आगे हाथ ले जा कर उनकी मोटी और रसीली चूत के ऊपर रख दिया. अब मेरी हथेली उनकी चूत और उस के ऊपर वाले पोर्षन पर थी और उंगलियाँ चूत के निचले हिस्से और गांड़ के सुराख के बीचों बीच रखी हुई थीं . फूफी फ़रहीन की चूत पर छोटे छोटे लेकिन सख़्त बाल थे जिन को सहलाते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. वो सीधी हो गईं.

“तुम पर तो फिर चोदने का भूत सवार है. घर की खबर भी है. कोई आ ना जाए.” उन्होने ऐसे कहा जैसे चुदवाने का भूत उन पर सवार नही था.
“घर में कौन होता है फूफी फ़रहीन नोकरानी तो छुट्टी पर है. मैं गेट बंद है. अगर कोई आया तो पता चल जाए गा.” मैंने उनकी फुद्दी के बाल उंगलियों में पाकाररते हुए जवाब दिया.
वो अपनी चूत पर मेरे हाथ की हरकत से एक दफ़ा फिर आगे को झुक गईं और में अब ज़रा दबाव डाल कर उनकी चूत पर हाथ फेरता रहा. फिर मैंने उन्हे सीधा कर के उनकी क़मीज़ उतारनी शुरू की. अपने लंबे और घने बालों को उन्होने प्लास्टिक की एक बड़ी सी चुटकी में बाँध रखा था. क़मीज़ उनके सर से नही उतार रही थी इस लिये मैंने उनकी चुटकी खोल कर हटा दी और उनके बाल आज़ाद हो कर बिखर गए. अब उनकी क़मीज़ सर से आसानी से उतार गई और फूफी फ़रहीन ब्रा के अलावा बिल्कुल नंगी हो गईं.

मैंने उनका ब्रा नही उतारा और वैसे ही उनके मम्मों को जो ब्रा में भी बड़े खूबसूरत लग रहे थे चूमने और चाटने लगा. फूफी फ़रहीन ने फिर मेरा लंड पकड़ लिया और उस पर अपना हाथ आगे पीछे करने लगीं. मैंने उनके ब्रा का हुक खोला और बेड पर लेट कर उन्हे अपने ऊपर घसीट लिया. उन्होने अपना ब्रा बाजुओं से निकाला और बेड पर आ गईं. बेड पर छर्रहटे ही उन्होने अपने दोनो हाथ मेरे सर के दोनो तरफ रख दिये. अब मेरा सर उनके हाथों के बीच में आ गया और उनके मोटे ताज़े मम्मे मेरे मुँह से कुछ फ़ासले पर झूलने लगे.

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मैंने उनके रेशमी गोल मम्मों को नर्मी से हाथों में पकड़ लिया और उनके निपल्स पर अपनी हतैलियाँ फेरने लगा. उनकी आँखें बंद थीं , होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट थी और वो खामोशी से अपने मम्मों के साथ होने वाले खेल का लुत्फ़ ले रही थीं . मै इसी तरह थोड़ी देर उनके भारी मम्मों का मसाज करता रहा. फिर मैंने ज़रा ज़ियादा ताक़त से उनके मम्मों को हाथों में भर भर कर मसलना शुरू कर दिया. फूफी फ़रहीन ने कई सिसकियाँ लीं और अपने मम्मे मेरे मुँह के और क़रीब कर दिये. मै उनके मम्मे मुँह में ले कर चूसने लगा. मैंने उनके मम्मों के निपल्स दाँतों में पकड़ लिये और उनकी नरम गोलाइयों को आहिस्तगी से काटा और उन पर ज़बान फेरी.
“आहिस्ता काटो दुखा रहे हो मेरे निपल्स को.” उन्होने मेरे माथे पर हाथ रख कर कहा और अपना मम्मा मेरे मुँह में घुसा दिया.

कुछ देर तक फूफी फ़रहीन के मम्मों के निपल्स चूसने के बाद मैंने उनके मोटे मम्मों को साइड से मुँह में डाला और अच्छी तरह चूसा. मै उनका एक मम्मा चूसता और दूसरे को हाथ में रख कर उसका मसाज करता रहता. वो बहुत गरम हो गई थीं और मम्मे चूसने के दोरान जब वो नीचे ऊपर होतीं तो उनके पेट और चूत का ऊपरी हिस्सा मेरे सीधे खड़े हुए लंड के साथ लगने लगता.

अब में उनके सारे पेट को चाटने लगा. मैंने उनकी नाफ़ के गहरे और गोल सुराख के इर्द गिर्द ज़बान फेरी तो वो और ज़ियादा सिसीकियाँ लेने लगीं. मैंने उनका पेट चूमते चूमते सर उठा कर ऊपर देखा तो उनके मोटे मम्मों के निपल्स तीर की तरह खड़े हुए थे और हर सिसकी के साथ उनके दोनो मम्मे अजीब तरह से हिलते थे.

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