मेरे दोस्तों के सात मिलके माँ को चोदा

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम शिवम जैन है और में जयपुर का रहने वाला हूँ.. दोस्तों में आज आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसमे मैंने और मेरे दो पक्के दोस्तों ने मेरी मम्मी को पटाकर चुदवाया. हम तीनों जयपुर के एक कॉलेज में पड़ते है और हम अभी 3rd साल में है और कॉलेज में ही हम तीनों एक दूसरे से मिले और हम तीनों एक ही ब्रांच के है और जल्दी ही हम तीनों बहुत अच्छे दोस्त बन गये.

कॉलेज में आने के बाद हम तीनों ने पहली बार एक साथ ही ब्लूफिल्म देखी थी और फिर एक दिन हमे सेक्स स्टोरीज़ साईट मिली.. जहाँ पर हमें बहुत सारी सेक्स स्टोरी पड़ने को मिली. हम सभी को आंटी और जवान लड़के के बीच सेक्स स्टोरी बड़ी पसंद थी.. हम पिछले एक साल से लगातार सेक्सी स्टोरी पड़ रहे है और मुठ मारते है. फिर हम तीनों किसी बड़ी उम्र की औरत को ढूंढने लगे.. जिसके साथ हम सेक्स कर सके.. लेकिन हमारी किस्मत बहुत खराब थी और हमे इतना ढूंढने के बाद भी कोई नहीं मिली.

फिर हम तीनों में से एक ने जिसका नाम राजेश है उसने हमे एक आईडिया दिया और उसने कहा कि अगर वो मेरी मम्मी के साथ सेक्स करे तो कैसा रहेगा? तो पहले तो हम दोनों यानी में और प्रतीक ने उसे डांटकर चुप करवा दिया.. लेकिन ना जाने क्यों उसकी बात अब धीरे धीरे हमारे दिमाग़ में बैठ गयी और कुछ दिनों बाद हम तीनों बैठे हुए तो मैंने और प्रतीक ने राजेश को उसकी बात पर राज़ी होने का और उसका साथ देने का फैसला सुनाया.

तो अब हम तीनों ने सोचा कि पहले और कैसे किसकी मम्मी को फंसाया जाए.. क्योंकि मेरी मम्मी हाऊस वाईफ थी और उम्र 40 साल से ज्यादा थी और फिर हमने निर्णय किया कि मेरी मम्मी को पटाया जाएगा और उन्हे चोदा जाएगा.. दोस्तों मेरी मम्मी का नाम छाया जैन है और उनकी उम्र 45 साल है और जैसा कि आप सब जानते है कि इस उम्र में औरते थोड़ी मोटी होती है.. वैसे मेरी मम्मी भी है और उनके बूब्स बहुत अच्छे है और उनके बाल बहुत घने और लंबे है.

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हम सबने निर्णय किया कि सबसे पहले सिर्फ़ एक ही मम्मी को पटाएगा फिर धीरे धीरे बाकी के दोनों को भी उसमे शामिल कर लिया जाएगा और हम सब सोचने लगे कि कैसे और कहाँ पर उनके साथ सेक्स किया जाए और कौन उन्हे पहले पटाएगा? तो राजेश ने कहा कि वो मेरी मम्मी को बहुत ज्यादा पसंद करता है और वो उन्हे पटाकर उन्हे चोदेगा और अब हम दोनों राज़ी हो गये. तो राजेश मेरे घर पर अब ज्यादा आने जाने लगा और मेरी मम्मी शाम के टाईम सब्ज़ी लेने मार्केट भी जाया करती थी.. कभी मेरे साथ तो कभी अकेले. तो जब भी मम्मी मार्केट अकेले जाती में राजेश को फोन कर देता और बता देता कि मम्मी आज अकेले मार्केट गयी है. तो राजेश वहाँ पर पहुंच जाता और मेरी मम्मी से मिलता और उनका सामान पकड़ने में मदद करता और साथ ही घर भी छोड़ने आता और ऐसे ही धीरे धीरे मम्मी का विश्वास उस पर बड़ने लगा और मैंने राजेश को मम्मी के बारे में कई बातें बताई कि उन्हे खाने में क्या पसंद है और उसे बहुत कुछ जानकारियां दी. मम्मी को आईसक्रीम और कचोरी बहुत ही पसंद है.. मैंने उसे यह भी बता दिया था.

एक दिन राजेश मेरे घर पर आया और उस समय मम्मी को मार्केट जाना था तो राजेश ने मम्मी से कहा कि वो उन्हे ले चलता है और फिर मम्मी उसके साथ चली गयी. फिर कुछ देर सामान खरीदने के बाद राजेश ने मम्मी को कहा कि उसका आईसक्रीम खाने का मन है क्या वो भी खाएगी? तो मम्मी ने मना कर दिया और कहा कि राजेश तुम खा लो.. तो राजेश ने पूछा कि क्या उन्हे आईसक्रीम पसंद नहीं है? तो मम्मी ने कहा कि नहीं.. उन्हे बहुत अच्छी लगती है. तो राजेश ने कहा कि तो फिर चलीये ना और वो मम्मी को ले गया.

फिर इसके बाद तो जब भी राजेश मम्मी के साथ मार्केट जाता तो उन्हे आइस्क्रीम पार्लर ले जाता और कभी कभी वो मम्मी को खुश करने के लिए आईसक्रीम घर पर ले आता. दोस्तों ऐसा चलते हुए दो महीने हो गये थे और राजेश ने मम्मी का पूरा विश्वास हासिल कर लिया और मम्मी का मोबाईल नंबर भी ले लिया. अब मम्मी को कभी भी कहीं भी जाना होता और पापा घर पर नहीं होते या में भी व्यस्त होता तो मम्मी राजेश को फोन करती और राजेश खुशी खुशी मम्मी के सामने हाज़िर हो जाता.

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मम्मी उसके आने से बहुत खुश होती और उससे फोन पर भी बात करती.. राजेश मम्मी को मैसेज करता.. मैसेज में चुटकले हुआ करते या कोई कविता होती और मम्मी उसके मैसेज का जवाब भी दिया करती और राजेश हमें यह सब बताता रहता था. फिर एक दिन मम्मी को कपड़े लेने जाना था तो मम्मी ने मुझसे चलने को कहा.. लेकिन मैंने सर दर्द होने का बहाना लगा दिया और मम्मी को कहा कि वो राजेश के साथ चली जाए. तो मम्मी ने राजेश को कॉल किया तो वो फोरन राज़ी हो गया और मम्मी उसके साथ मार्केट चली गयी और करीब तीन घंटे के बाद मम्मी अकेली ऑटो से घर आई.

तो मैंने मम्मी से पूछा कि वो तो राजेश के साथ गयी थी फिर ऑटो से कैसे आई? तो मम्मी ने कहा कि राजेश के घर से फोन आया था तो उसे घर जाना पड़ा और वो ऑटो से आ गयी. फिर वो अपने रूम में कपड़े चेंज करने चली गयी और उसी शाम को हम तीनों प्रतीक के घर मिले.. तो मैंने वहाँ पर राजेश से पूछा कि घर पर ऐसा क्या काम आ गया था जो मम्मी को मार्केट में छोड़कर घर जाना पड़ा? तब राजेश ने बोला कि घर से कोई फोन नहीं आया था और फिर वो पूरी बात बताने लगा कि क्या हुआ और उसने बताना चालू किया कि मम्मी ने मार्केट से साड़ियाँ खरीदी और राजेश ने भी मम्मी का साड़ी पसंद करने में पूरा पूरा साथ दिया और मम्मी ने उसकी पसंद की हुई एक साड़ी भी खरीदी.

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