दोस्त ने बोलै चोद मेरी बीवी को

मैं अन्तर्वासना का एक लम्बे समय से पाठक रहा हूँ. लेखकों द्वारा साझा किए गए अनुभव पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगता है. उनकी कहानियां पढ़कर मैंने भी कई बार सोचा कि मैं भी अपने जीवन से जुड़ी ऐसी घटनाओं के बारे में लिखूँ.

तो दोस्तो, आज मैं पहली बार अपनी एक मस्त सेक्सी कहानी बताने जा रहा हूँ. अगर आप पाठकों को मेरी यह कहानी पसंद आयी, तो मैं आगे भी लिखूंगा.

मेरा नाम विक्की है और मैं फिलहाल दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी यह कहानी मेरे सहकर्मी और उसकी बीवी की है. हुआ यूँ कि मेरा तबादला चंडीगढ़ से दिल्ली ताज़ा ताज़ा हुआ था. कंपनी ने मेरे लिए पन्द्रह दिन के होटल का बंदोबस्त कर दिया था. लेकिन मुझे इन पन्द्रह दिनों में अपने लिए मकान ढूंढ़ना था.

खैर, मैं पहले दिन ऑफिस गया और वहां अपनी टीम से मुलाकात की. मेरे मैनेजर ने मेरा परिचय संजय से करवाया. उन्होंने बताया कि संजय बहुत अच्छा इंसान है … और ये घर ढूंढने में तुम्हारी मदद कर देगा.
मैंने थोड़ी राहत की सांस ली कि चलो कोई तो साथ देगा.

संजय एक गोरा चिट्टा जवान था, उसकी लगभग चौबीस साल की उम्र रही होगी. वो उम्र में मुझसे कुछ ही बड़ा था.

संजय ने बताया कि वह ऑफिस के पास ही रहता है और उसी की बिल्डिंग में एक दो कमरों का फ्लैट खाली है, अगर मैं शाम को काम खत्म होने बाद चलूं, तो वह मुझे फ्लैट दिखाने का बंदोबस्त करवा सकता है.
मैंने हां कर दिया और काम में लग गया.

शाम लगभग सात बजे संजय ने मुझे याद दिलाया कि घर देखने जाना है.
मैंने मैनेजर से इज़ाज़त ले ली और संजय के साथ फ्लैट देखने चला गया.

फ्लैट देख कर मुझे पसंद आया और मैंने मकान मालिक को एडवांस देकर घर बुक कर लिया.
इसके बाद हम दोनों आने लगे, तो संजय ने मुझसे उसके घर चलकर चाय नाश्ता करने का आमंत्रण दिया.
चूंकि दिल्ली में मैं नया नया आया था, तो मुझे भी दोस्त चाहिए थे. मैंने हां कर दी.

उसका फ्लैट भी साथ वाला ही था. उसने बेल बजायी, तो उसकी बीवी ने दरवाज़ा खोला. वैसे तो सभी औरतें देखने में खूबसूरत होती हैं, लेकिन जैसा संजय गोरा चिट्टा था, उसकी बीवी भी वैसे ही गोरी थी. भाभी जी ने काले रंग का शार्ट स्लीव टॉप पहन रखा था और नीचे पजामा.

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शायद उनको संजय के साथ किसी और के आने की उम्मीद नहीं थी. संजय ने दरवाज़े पर ही मेरा उनसे परिचय करवाया और उनका नाम हंसिका बताया.
हंसिका भाभी ने मुझसे अन्दर आने को बोला.

मैंने अन्दर जाकर देखा, तो भाभी ने अपना ड्राइंग रूम बहुत अच्छे से सजा रखा था. मैं सोफे पर बैठ गया. संजय और हंसिका अन्दर गए.

मुझे अन्दर से थोड़ी बहस की आवाज़ आती सुनाई दी. ये मुझे थोड़ा असहज लगा.
खैर थोड़ी देर में संजय पानी लेकर आया और बोला- आप आराम से बैठिये, इसे अपना ही घर समझें.

मेरे पानी पीते पीते हंसिका भाभी ने चाय और नमकीन पेश कर दिया था. मैंने मौके को संभालने के लिए कुछ बोलना चाहा, लेकिन इससे पहले ही हंसिका ने बोला कि अच्छा हुआ कि आपने पास वाला फ्लैट लिया है, कम से कम कोई बोलने वाला तो मिलेगा, नहीं तो दिल्ली में लोगों को यह भी नहीं पता होता कि पास में कौन रह रहा है.

मैंने हां में हां मिलाई और साथ में माफ़ी भी मांगी कि मेरी वजह से आप दोनों में बहस हो गयी.

इस बात पर हंसिका भाभी ने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, मैं इसलिए थोड़ी उदास हो गयी थी कि संजय ने अगर पहले बताया होता, तो मैं तैयार भी रहती और कुछ बना भी लेती.
मैं बोला- भाभीजी अब तो यहीं रहने आ रहा हूँ . … आपका जब मन करे, खिला देना. वैसे भी मैं खाने के मामले में थोड़ा बेशरम किस्म का इंसान हूँ.
इस बात पर सब हंसने लगे.

खैर चाय पीकर मैं होटल को रवाना हो गया. यह सोमवार का वाकिया था.

काम में दो तीन दिन कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला. गुरुवार को संजय ने मुझसे पूछा कि क्या आप शुक्रवार को मेरे घर डिनर करना पसंद करेंगे?

मैं भी बाहर का खाना खा के बोर हो रहा था, मैंने हां कर दिया.
इस पर उसने पूछा- आप ड्रिंक करते हैं या नहीं?
मैं बोला- हां मैं करता तो हूँ, लेकिन भाभीजी बुरा ना मान जाएं.

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संजय ने तुरंत बोला- हम दोनों शुरूआत से ही एक साथ ड्रिंक करते हैं और हम दोनों को कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.
इस तरह हमारा डिनर का प्लान पक्का हो गया.

मैं शुक्रवार को संजय के साथ ही उनके घर गया. भाभीजी ने दरवाज़ा खोला. मैं हैरान हो गया, भाभीजी ने पूरा मेकअप कर रखा था और साथ में लहंगा चोली पहना हुआ था. बैगनी कलर का लहंगा उनके गोरे बदन पर बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था. लाल लिपस्टिक उनके होंठों को चार चाँद लगा रही थी. उनकी भूरी आंखों पर काजल तो शायद उनकी गहराइयां और बढ़ा रही थी.

मैं उनको अच्छे से देखने लगा, फिर मुझे खुद ही बुरा लगा कि मेरी मदद करने वाले इंसान की बीवी को मैं ऐसे देख रहा हूँ.
इतने में भाभी ने खुद ही पूछ लिया- दरवाज़े पर ही खड़ा रहेंगे या अन्दर भी आएंगे.

मैं झेंप सा गया और अन्दर आते हुए उनको रास्ते से ख़रीदा हुआ फूलों का गुलदस्ता देते हुए बोला- आप इतनी खूबसूरत लग रही हैं कि मैं हैरान हो गया.

उन्होंने हंसते हुए कहा- चलो किसी को तो मेरी खूबसूरती दिखी.
यह बोलते हुए थोड़ा शरारती तरीके से भाभी जी ने संजय की तरफ देखा.
संजय ने एक स्माइल दी और बोला- मैं तो हमेशा ही तुमको सुन्दर बोलता हूँ.

हम सब हंसते हुए सोफे पर बैठ गए और भाभीजी ने तुरंत ही स्नैक्स, आइस, गिलास और स्कॉच की बोतल ला कर रख दी.

हम तीनों ड्रिंक करते हुए गप्पें मारने लगे. इस बीच में उन दोनों के बारे में पता चला कि उनकी अरेंज्ड मैरिज है. घर वाले अमीर हैं और कुछ रिलेटिव्स कनाडा में भी सैटल्ड हैं. ये दोनों भी शायद कुछ सालों में वहीं शिफ्ट हो जाएंगे.

खैर हमने ड्रिंक करके डिनर किया और उसके बाद मैं होटल वापस चला आया.

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