तलाक़ के बाद गैर मर्द से चुदाई 1

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जैसा कि आप जानते हो कि मेरी कहानी मेरे अपने अनुभव या मेरे साथ घटित घटनाओं पर आधारित होती हैं. मैं अपनी नौकरी की वजह से सम्पूर्ण भारत का भ्रमण करता हूँ, अनगिनत लोगों से मिलता हूँ, उनके किस्से सुनता हूँ. कुछ किस्से मेरे साथ भी यात्रा के दौरान घटित होते है जिसको मैं आपके सामने कहानी के रूप में ले कर आता हूँ.

ऐसी ही एक सेक्सी दास्ताँ लेकर मैं आपके सामने हूँ. एक ऐसी दास्ताँ जिसमें आपको जीवन की कुछ सच्चाई और और जिंदगी के सबक दे जाएगी.

हुआ कुछ यों कि दिल्ली से मुंबई आते वक़्त राजधानी एक्सप्रेस में एक शख्स संदीप से मेरी मुलाकात हुई. 16-17 घंटे के सफर में मेरी अच्छी दोस्ती हो गई संदीप से! और ऐसी दोस्ती हुई कि उसने पूरा जीवन अपना खोल के रख दिया.
मेरा लेखक दिल नहीं माना और फिर उसकी अनुमति से उसकी दास्ताँ मैं आप तक पंहुचा रहा हूँ. आशा है कि आपको भी पसंद आएगी.

यह कहानी आप संदीप की जुबानी ही पढ़ियेगा, इसमें कामुकता और वासना का तड़का मैंने लगाया है, उम्मीद है आपको पसंद आएगा.

मेरा नाम संदीप है, मैं उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूँ और आजकल मुंबई में हूँ.
मैंने शादी 21 साल की उम्र में कर ली और मेरा एक बेटा 12 साल का बेटा भी है. मेरी पत्नी का नाम निधि है. शादी से पहले मैं निधि से नहीं मिला था. वो कानपुर के पास के गांव शुक्लागंज की थी.
निधि बहुत ही तेज़तर्रार लड़की थी.

हम दोनों शादी के बाद आगरा आ गए. शादी के बाद कुछ साल तो सब ठीक चला … पर बाद में हमारे झगड़े बहुत होने लगे कभी पैसों को लेकर तो कभी बेसिक सुख सुविधाओं को लेकर!
मैंने भी और मेहनत करनी शुरू कर दी ताकि मैं और पैसे कमा सकूं और निधि को और ज्यादा सुख सुविधायें उपलब्ध करा सकूं.

इन सब का नतीजा यह हुआ कि मैं काम में इतना मसरूफ होता गया कि मेरी अपनी जिंदगी नर्क हो गई, सेक्स सम्बन्ध तो न के बराबर हो गए.
निधि की ख्वाहिशें बढ़ती जा रही थी.

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इस बीच मेरी नौकरी चली गई. निधि ने कुछ दिन तो बर्दाश्त किया पर अंत में वो मुझे छोड़ कर अपने माता पिता के पास चली गई, बात तलाक तक पहुंच गई.

मैं भी अंदर से टूट सा गया. अब मेरे पास न नौकरी थी न बीवी और न मेरा बेटा!
इन सबने मुझे तोड़ कर रख दिया. मेरी मदद को करने से हर उस शख्स ने इंकार किया जिसको मैं अपना समझता था.

ऐसे में एक आदमी फरिश्ता बनकर आया. वो था मेरा एक पुराना बॉस. उन्होंने मुझे नौकरी दी और मुझे इन सब से दूर मुंबई भेज दिया.

कहते हैं कि मुंबई सपनों का शहर है. मैं भी आ गया और न्यू मुंबई एरिया में 1 रूम सेट किराये पे लेकर रहने लगा. यहाँ मुझे कोई नहीं जानता था. निधि और मेरे बेटे से मेरा नाता टूट ही गया था और सेक्स तो जीवन में था ही नहीं. अब मैं घर से फैक्ट्री और फैक्ट्री से घर तक सीमित रह गया.

मेरी तरक्की होती गई, मैं 1 रूम से ३ रूम फ्लैट में आ गया. पूरी फैक्ट्री मेरे भरोसे हो गई.

जब मेरे बॉस ने एक नई फैक्ट्री दमन में डालने का फैसला किया तो मैं दमन आ गया.
मेरा घर फैक्ट्री साइट से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर था. मैं कभी पैदल तो कभी कार से जाता था साइट पर.

यहाँ दमन में मेरी ज़िंदगी में रंगीन पल आया.

ऐसे ही एक दिन काफी देर रात लगभग 12.30 का टाइम होगा, फैक्ट्री में ओवरटाइम करवा के जब मैं घर वापस आ रहा था तो मुझे एक लड़की या ये कहिये एक महिला ने हाथ देकर रोका. मैंने कार रोक कर पूछा तो पता चला कि वो मुंबई से आई थी और उसका पर्स और कपड़े एक का बैग कोई लेकर भाग गया है. उसके पास अब कोई भी आइडेंटिटी, रूपए, मोबाइल और कपड़े नहीं थे. वो मदद चाहती थी कि मैं उसकी मुंबई तक पहुंचने में मदद करूं.

पता नहीं क्या सोचकर मैं मदद को तैयार हो गया. फिर मैंने उसको अपने साथ लिया और एक रेस्टोरेंट में खाना खिलाया, वापी स्टेशन तक ले गया, जहाँ मैंने उसको टिकट दिलवाया और उसको कुछ पैसे भी दिए.
उसने मेरा नंबर माँगा, वो भी दे दिया.

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इस बात को काफी दिन हो गए और मैं भूल भी गया था और तो और … मैंने उसका नाम भी नहीं पूछा था.

करीब एक साल बाद मुझे एक कॉल आई. उस समय मैं मुंबई में ही था. बहुत मीठी से आवाज़ आई- हेलो, मिस्टर संदीप जी बोल रहे हैं?
मैं- जी हाँ बोल रहा हूँ. आप कौन?
“आपने मुझे पहचाना नहीं … काफी दिन पहले आपने मेरी मदद की थी.”
तब मुझे उस लेडी की याद आई- ओह्ह … अब आपको याद आई मेरी? वो भी साल के बाद?
“नहीं … याद तो मैंने आपको बहुत किया. पर फ़ोन नहीं किया क्योंकि मैं आपको परेशान नहीं करना चाहती थी.”

“अच्छा आप बताइये … आज कैसे याद आई आपको मेरी?”
“कुछ नहीं … याद तो आपको बहुत किया क्योंकि आपने जो निस्वार्थ मेरी मदद की वो मैं भूल नहीं सकती. अभी मैं मुंबई में हूँ और आपसे मिलना चाहती हूँ. क्या आप मुझसे मिलना चाहेंगे?”
“मुंबई में हूँ से क्या मतलब?” आप तो शायद मुंबई में ही रहती थी.
“जी नहीं, अब मैं चंडीगढ़ में रहती हूँ. मैं सब कुछ छोड़ कर अब अपने माता पिता के साथ रहती हूँ. किसी काम के सिलसिले में आई थी तो सोचा आपसे मिल कर आपका शुक्रिया अदा कर दूँ.”

“बताइये आप कहाँ हैं?” मैंने पूछा.
“मैं इस समय बांद्रा में एक फ्रेंड के यहाँ हूँ. क्या हम लोग लिंकिंग रोड में मिल सकते है?”

करीब एक घंटे बाद मैंने पहुंच के फ़ोन किया. हम वहां मिले. आज वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही थी. उस दिन परेशानी में ठीक से देखा नहीं होगा मैंने!

सिल्क’ यह उसका नाम नहीं है पर मैं उसको इस कहानी में सिल्क ही बुलाऊंगा. सिल्क इसलिए कि वो सिल्क जैसी ही दिखती थी. बहुत गोरी तो नहीं थी पर आप उसे गोरी कह सकते हैं. फिर भी स्किन का ग्लो बहुत था. करीब 30-31 साल की सिल्क एक आकर्षक महिला थी जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दे.

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