मुझसे बड़ी उमर की दीदी के सात कामुकता

मेरा नाम जिग्नेश है और में गुजरात के एक शहर में अपने पापा के साथ रहता हूं. मेरी मम्मी नहीं है और में घर पे ही अकाउंटस लिखने का काम करता हूँ. मेरा शरीर ठीक है या शायद कुछ पतला सा है और लंड भी ठीक है.
यह कहानी मेरी और मेरे अंकल की लड़की की है. मेरी उम्र 24 साल है और इससे पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था. मन तो बहुत करता था पर कभी जुगाड़ नहीं हुआ. हाँ, कभी मैं ब्लू फिल्म देख लेता या मुठ मार लेता था, या कभी मौका मिले तो किसी औरत को छू लेता था. लेकिन सेक्स किया नहीं था, सेक्स का ज्ञान मुझे बहुत था.

तो हुआ यूं कि एक दिन में बाहर गया था और पापा को उस दिन काम से छुट्टी थी तो वो घर पर थे. शाम को जब मैं घर आया तब देखा कि पापा के एक दोस्त मेरे अंकल की बेटी जिसका वास्तविक नाम मैं नहीं बताना चाहता, वो आई हुई थी. उसका नाम मिष्टी रख लेते हैं. मैंने उन्हें दीदी कहता था.
मैंने सोचा कि मिष्टी अपने किसी काम के सिलसिले में आई होगी. मैंने उनके साथ थोड़ी बातें की. मिष्टी की उम्र 26 या 27 साल है और उनका फिगर भी अच्छा है जो सेक्स में पूरा मजा दे सके.उनके बूब्स का साइज 40 या 41 के पास होगा.

उनसे बात करते हुए मुझे पता चला कि वो यहाँ 10 दिन रहेगी क्योंकि उनके घर पे उनके रूम का रिनोवेशन हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैंने कभी उनके बारे में गलत नहीं सोचा था और न ही वो मेरे घर आई, तब मैंने सोचा.
खैर उस शाम हमने थोड़ी बातें की और खाना खाकर सो गए.

दूसरे दिन सुबह पापा तो चले गए उनके टाइम पर … मैं 10 बजे के आसपास उठा तब दीदी ने चाय बनाई और हमने साथ में चाय नाश्ता किया. उसके बाद मैं नहाने गया और नहाने के बाद मैं एक घंटे के लिए बाहर गया.

दोपहर को मैं जब घर आया तब मैंने देखा कि मिष्टी दी ने एक टीशर्ट और नीचे पजामा पहना हुआ है शायद उन्होंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी.
मुझे देख कर उन्होंने कहा- तुम हाथ मुंह धो लो और खाने बैठ जाओ.
मैंने कहा- आप सारा खाना बना लो, हम साथ में खाएंगे.
तो उन्होंने कहा- नहीं, तुम बाहर से आये हो तो गरमागरम खा लो, मैं रोटी बनाकर तुम्हें परोसती हूँ.
मैंने कहा- ठीक है!
और मैं बैठ गया.

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वो जब भी रोटी देने के लिए झुकती तब दी के बूब्स दिखते थे. पर मैंने कुछ खास ध्यान नहीं दिया क्योंकि मुझे लगा कि टीशर्ट पहना है तो इतना तो दिखता है.
मैंने खाना खा लिया और बाद में उन्होंने भी खाना खा लिया.

दी घर पे नई थी और उनको मालूम नहीं था कि घर में कौन सी चीज कहाँ पड़ी है तो वो बार बार मुझे आवाज लगाकर बुलाती थी और मैं जब भी उनके पास जाता, मैंने देखा कि वो मेरे एकदम नजदीक खड़ी रहती थी ताकि मैं उनकी बॉडी पूरी देख अकूँ और उत्तेजित होऊँ. फिर मुझे लगा कि शायद ऐसा नहीं हो सकता, वो मेरा वहम है और मैंने कुछ ध्यान नहीं दिया.

लेकिन मिष्टी दी बार बार मुझे कोई ना कोई काम के बहाने अपने पास बुलाती और एकदम बाजू में खड़ी रहती. दो तीन बार तो उनका हाथ मेरे लंड को भी लगा पर मुझे लगा कि गलती से हुआ होगा.
फिर मैंने मार्क किया कि वो जब भी मुझे बुलाती, तब वो एकदम मेरे आगे खड़ी रहती थी ताकि उनकी गांड मेरे लंड को छू सके या उनका हाथ!
अब मुझे थोड़ा डाउट होने लगा पर मैंने कुछ नहीं कहा.

दो तीन दिन यों ही बीत गए लेकिन इन दो तीन दिन में उनकी गांड और हाथ कई बार मेरे लंड से टच हुए और उनके बार बार झुकने से उनके बूब्स भी दिखे पर मैंने कुछ किया नहीं! क्योंकि मुझे डर लग रहा था कि कहीं यह मेरा वहम निकका की वो मुझे उत्तेजित कर रही है.

लेकिन मुझे याद है पाँचवें दिन जब मैं सुबह उठा तब मैंने देखा कि दी आज कुछ अलग दिख रही हैं. शायद उनके दिमाग कुछ चल रहा था.
उसके बाद मैं नहाने चला गया. नहाने के बाद मैंने चाय नाश्ता किया उनके साथ और फिर मैं मोबाइल में गेम खेलने लगा और वो नहाने चली गई.

दी जब नहाकर बाहर आई तब मैंने देखा कि उन्होंने मेरा एक शर्ट और नीचे पजामा पहना है.
मैंने पूछा- मेरा शर्ट क्यों पहना है आपने?
तो उसने कहा- बस ऐसे ही आज मन हुआ तो मैंने पहन लिया!
मैंने कहा- ठीक है!

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पर शर्ट में उनके बड़े से बूब्स एकदम मस्त दिख रहे थे और शायद इसीलिए उन्होंने जानबूझकर शर्ट पहना था. मैंने देखा कि उन्होंने शर्ट का एक बटन खुला रखा हुआ है ताकि वो जब भी झुकें तब मैं उनके बूब्स देख सकूँ. थोड़ी देर उन्होंने घर का काम किया और फिर थोड़ा टीवी देखने के बाद 12:30 बजे तो उन्होंने कहा- मैं खाना लगाती हूँ. तू बैठ जा, मैं गरमागरम रोटी तुझे खिलाती हूं.
मैंने कहा- ठीक है!
और मैं लंच करने बैठ गया.

लेकिन खाते समय मैंने नोटिस किया कि वो आज रोटी देने के लिए कुछ ज़्यादा ही झुक रही है. पर मैंने फिर एक बार ऐसा सोचा कि मेरा वहम होगा और खाना खा लिया. खाने के बाद मैं तो अपना मोबाइल लेकर बैठ गया और वो अकेले खाना खाने बैठ गई.

दी ने खाना खा लिया और जहाँ मैं बैठा था, वहाँ एकदम बाजू में आकर लेट गई, कहने लगी- मैं 5-10 मिनट आराम कर लेती हूं, उसके बाद झाड़ू और पौंछा लगाती हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.
और मैंने नोटिस किया कि दी ने लेटते हुए भी शर्ट का बटन खुला रखा है और ऐसे लेटी हैं कि मैं उनके बूब्स देख सकूँ. मैंने देखा कि उनके बूब्स साफ दिखाई दे रहे थे लेकिन दी के निप्पल देखने में थोड़ी परेशानी हो रही थी.

दी के बूब्स देखने के कारण मेरा भी लंड खड़ा हो गया था और उन्होंने यह देखा कि मेरा लंड तना हुआ है तो अनजान बनते हुए एक हाथ मेरे लंड के ऊपर रखकर उठने लगी और कहा- चलो अब काम कर लेती हूं.
और वो झाड़ू लगाने लगी. मैंने देखा कि उनके शर्ट के ऊपर के दो या तीन बटन खुले हुए हैं और उनका एक बूब पूरा बाहर है और वो अनजान बनकर झाड़ू लगा रही थी. वो मेरे एकदम पास आकर झाड़ू लगा रही थी और स्तनों के दर्शन करवा रही थी. मेरी हालत एकदम खराब थी और लंड भी अकड़ रहा था पर वो अनजान बनकर सबकुछ तमाशा देख रही थी.

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