दीपाली की ख़ूबसूरत चुत मिलगया

मैं बहुत बुरी तरह से डर गया और हकलाते हुये कहा- जीजी मैं कहाँ भागा जा रहा हूँ और मेरी इतनी हिम्मत ही कहाँ है कि जो मैं आप से भाग सकूँ?

इस पर दीपाली ने कहा- अभी जब तूने मुझे देखा था तब तो जल्दी से भाग गया था और अब बात बना रहा है।

मैंने कहा- जीजी, मुझ को कार को एक तरफ़ तो लगाने दो और फिर अंदर बैठ कर बात करते हैं।

वो बोली- ठीक है !

मैंने कार को एक तरफ़ लगा दिया और दीपाली के साथ अंदर अपने घर में चला गया। मैंने अपने कमरे में जाते ही ए सी ओन कर दिया क्योंकि घबराहट के मारे मुझे पसीना आ रहा था। फिर मैं अपने होंठों पर जबरदस्ती हल्की सी मुस्कान ला कर बोला- आओ जीजी बैठ जाओ और बोलो कि क्या कहना है। और ऐसा कहते-2 मैं रूआंसा हो गया।

वो बोली- डर मत ! मैं तुझको मारुंगी या डाँटूंगी नहीं ! मैं तो यह कहने आई हूँ कि तू उस दिन छत से क्या देख रहा था?

तो मैं अनजान सा बनने लगा और कहा- जीजी आप कब की बात कर रही हैं, मुझे तो कुछ ध्यान नहीं है।

तो उन्होंने हल्का सा मुसकरा कर कहा- साले बनता है ! अभी इतवार को सुबह छत से मुझे नंगा नहीं देख रहा था?

मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो बोली- क्या किसी जवान लड़की को इस तरह नंगा देखना अच्छा लगता है? शरम नहीं आती?

तो मैंने कहा- जीजी आप हो ही इतनी खूबसूरत कि आपको उस रोज नंगा देखा तो मैं आँखें ही नहीं फेर सका और मैं आपको देखता ही रहा। वैसे मैं बड़ा ही शरीफ़ लड़का हूँ और आप को ही पहली बार मैंने नंगा देखा है।

तो वो हंस कर बोली- हाँ-हाँ ! वो तो दिखाई ही देय रहा है कि तू कितना शरीफ़ लड़का है जो जवान लड़कियों को नंगा देखता फिरता है।

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मैंने भी झट से कहा- जीजी उस रोज आप टांगों के बीच बालों को बार-बार क्यों रगड़ रही थी तो इस पर वो शरमा गई और बोली- धत्त ! कहीं जवान लड़कियों से ऐसी बात पूछी जाती है !

तो मैंने पूछा- फिर किससे पूछी जाती है?

तो उसने इतना ही कहा- मुझे नहीं मालूम !

अब मैं समझ गया था कि वो उस रोज देखने से ज्यादा नाराज़ नहीं थी। उस समय तक मेरा डर काफ़ी हद तक कम हो गया था और मेरा लण्ड खड़ा होना शुरु हो गया था।

मुझे फिर मस्ती सूझी और मैंने फिर से दीपाली से पूछा- जीजी बताओ ना कि तुम उस रोज क्या कर रही थी?

यह सुन कर वो पहले तो मुस्कुराती रही और फिर एकदम से बोली- क्या तू मुझे फिर से नंगा देखना चाहेगा?

मेरा दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा और मैंने हल्के से कहा- हाँ जीजी ! मैं फिर से आपको नंगा देखना चाहता हूँ।

तो वो बोली- क्या कभी तूने पहले भी यह काम किया है?

मैंने कहा- नहीं !

तो उसने कहा- आ मेरे पास ! आज मैं तुझको सबकुछ सिखाऊंगी और यह कह कर उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे होंट चूमने लगी। मैंने भी उसको कस कर पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी तो मैंने अपना मुँह खोल कर उसकी जीभ चूसनी शुरु कर दी। इधर मेरा लण्ड भी चोट खाये काले नाग की तरह फ़नफ़ना रहा था और पैंट में से बाहर आने के लिये मचल रहा था। मैंने एक हाथ बढ़ा कर दीपाली की तनी हुई चूची पर रख दिया और बड़ी बेताबी के साथ उसको मसलने लगा। दीपाली का सारा शरीर एक भट्टी की तरह तप रहा था और हमारी गरम सांसें एक दूसरे की सांसों से टकरा रही थी। ऐसा लग रहा था कि मैं बादलों में उड़ा जा रहा हूँ। अब मेरे से सबर नहीं हो रहा था। मैंने उसकी चूची मसलते हुये अपना दूसरा हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया और उनको बहुत बुरी तरह मसलने लगा।

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दीपाली के मुँह से हल्की सी कराहने की आवाज निकली- ओह्हह्हह्ह।।।।।अयीईई।।। और बोली- जरा आराम से मसलो ! मैं कोई भागी नहीं जा रही हूँ, जोर से मसलने पर दर्द होता है।

लेकिन मैं अपनी धुन में ही उसके चूतड़ मसलता रहा और वोह ओह्हह्हह्ह।।।।।।।।।।। अययययीए।।।।। करती रही।

यह आवाजें सुन कर मेरा लण्ड बेताब हो रहा था और पैन्ट के अंदर से ही उसकी नाभि के आस पास टक्कर मार रहा था। मैंने उसके कान में फ़ुसाफ़ुसाते हुये कहा- अपनी सलवार कमीज़ उतार दो !

तो पहले तो वो मना करने लगी लेकिन जब मैंने उसकी कमीज़ ऊपर को उठानी शुरु की तो उसने कहा- रुको बाबा ! तुम तो मेरे बटन ही तोड़ दोगे ! मैं ही उतार देती हूँ !

और यह कह कर उसने अपनी कमीज़ के बटन खोल कर अपनी कमीज़ उतार दी। अब वोह सिरफ़ सफ़ेद ब्रा और सलवार में खड़ी थी। मैं उसको देखता ही रह गया। उसकी बगल में एक भी बाल नहीं था, शायद रविवार को ही बगल के भी बाल साफ़ किये थे। मैंने अपना दहिना हाथ उठा कर उसकी बाईं वाली चूची पर रख दिया और ब्रा के ऊपर से दबाने लगा और दूसरे हाथ को मैं उसकी गाण्ड पर फिरा रहा था।

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