दारू के नशे में बाप ने मेरी बुर चुदाई की

बाबूजी मुझे किसी भालू की तरह चोद रहे थे.
मैंने भी मस्ती में आकर उनकी जफ्फी भर ली और उनके चूतड़ पर हाथ फेरा. आह … उनके चूतड़ बहुत सॉलिड थे, तब मुझे आभास हुआ कि भाभी क्यों चीखती थी.
मेरी टाइट चूत मेरे से ज्यादा चीखने लगी.

न बाबू जी को होश था और न मुझे!
और आखिरी पलों में तो मैं जैसे किसी स्वर्ग की सैर कर रही थी. मेरी बच्चेदानी का जम कर चुदान हो रहा था, बाबूजी पूरी ताकत लगा रहे थे और अब मुझे मुश्किल हो रही थी. मुझे लग रहा था की बाबूजी का लौड़ा कोई साधारण लौड़ा नहीं है क्योंकि आज तक मुझे पहले कभी भी इतना आनंद नहीं आया था।

बाबूजी ने मेरे ब्लाउज़ के बटन खोलने की कोशिश की पर जब नहीं खुले तो उन्होंने एक झटके में ब्लाउज़ के बटन तोड़ दिए और मेरे चूचे बुरी तरह मसल दिए उनके हाथ एक किसान के हाथ थे.

एक तो लौड़ा अंदर ठोकरें मार रहा था और फिर बाबूजी ने मेरे इतने अंदर लौड़ा पेल दिया कि मैं बता नहीं सकती। मुझे लगा कि कम से कम सात इंच लम्बा लौड़ा था उनका!
वो मुझे चूतड़ तक नहीं उठाने दे रहे थे!

‘आह!’ और जब लास्ट धक्का मारा तो मैं अपनी चीख रोक नहीं सकी और मुंह से आह निकल गयी. और तभी गर्म गर्म तेज फुहारें मेरे बदन में समाती चली गयी. आह … क्या आनन्द था इस चुदाई में!

बाबू जी का लौड़ा मेरी चूत में बुरी तरह काँप रहा था. पर फिर जैसे ही धारें गिरनी बंद हुई, वो एकदम से मेरे जिस्म से उतरे और लौड़ा भी लगभग खींच कर ही निकाला।
और फिर बड़ी तेजी से अपना कच्छा उठा कर दरवाजा खोल कर निकल गये.

शायद उन्हें मेरी आवाज से पता चल गया था कि मैंने किसी और की चुदाई कर दी है।

मैं भी कुछ देर बाद वहां से उठी और भाभी के पास आ गयी.

भाभी ने लाइट जलाई और मेरी तरफ देखा मेरा ब्लाउज़ एकदम खुला हुआ था.
उन्होंने हँसते हुए कहा- रमा हो गया तेरा काम? पड़ गयी ठण्ड? कैसा लगा?
मैंने शरमाते हुए कहा- भाभी, तुम बाबूजी को कैसे झेलती हो?
उन्होंने कहा- अरे रमा, हमारे मर्द तो बाऊजी के आगे कुछ भी नहीं हैं। आज तो देख ही लिया कि क्या करेंट है ससुर जी में।

भाभी आगे बोली- और सुन, भूल कर भी किसी को मत बताना ये बात!
मैंने कहा- भाभी, तुम्हारे तो मजे है यार! पर अब सुबह क्या होगा? मैं उन्हें कैसे मुंह दिखाऊंगी?
उन्होंने कहा- चिंता मत कर … शर्म तो उन्हें होगी कि अपनी बेटी की चूत ही बजा डाली नशे में!

और कहानिया   कुवारी चुत का रास

“वो तेजी से भागे!” भाभी ने कहा- इसका मतलब है कि उन्होंने तेरी आवाज पहचान ली।
मैंने कहा- भाभी, अब क्या होगा?
उन्होंने कहा- देख, मर्द जात होती है न … इसका कुछ नहीं पता! तू घबरा मत, मैं हूँ न, पर ये बता तेरी खुल गयी न अच्छी तरह से?

मेरा शर्म के मारे बुरा हाल था.
भाभी ने कहा- चिंता मत कर।

मेरी भाभी की बातों से मुझे थोड़ा आराम हुआ पर मन में बेहद आत्मग्लानि थी कि मैं ऐसी बेटी हूँ जो अपने ही बाप से चुद गयी हूँ.
भाभी ने कहा- तू फ़िक्र मत कर, मैं सब संभाल लूंगी. और तू जब तक यहाँ है, अपने बाप से मजे लेती रह! मेरा क्या है मैं तो यहीं हूँ न।

मैंने कहा- भाभी सुनो, बाऊजी तो बहुत स्ट्रांग हैं.
उन्होंने कहा- और पगली! देखा नहीं कि उनका लिंग कितना बड़ा और मोटा है?
मैंने कहा- हाँ भाभी, कमरे में बिल्कुल अँधेरा था. मैं उनका लिंग नहीं देख सकी. पर मेरी तो जान ही निकल गयी थी.
भाभी ने कहा- अरे पुराने मर्द हैं … साले जल्दी से झड़ते नहीं हैं. और औरत को क्या चाहिए!

इसके बाद वो अपने बिस्तर पर चली गयी. सुबह जब मैं उठी तो बाबूजी घर पर नहीं थे.
मैंने भाभी को पूछा तो उन्होंने बताया कि वो खेत पर पानी लगाने गए हुए हैं.

भाभी को मैंने पूछा- बाबूजी ने तुम कुछ बताया तो नहीं?
तो भाभी ने कहा- नहीं यार, कुछ नहीं बताया!
तो मैंने आराम की साँस ली।

मैंने भाभी को कहा- मैं उन्हें कैसे मुंह दिखाऊंगी?
तब उन्होंने कहा- फ़िक्र मत कर। सब ठीक हो जायेगा. आज भी तू ही सोना. अच्छा तो है जो उन्हें पता चलेगा। .

फिर भाभी ने अगले दिन यानि रात को फिर अपने कमरे में भेज दिया.

बाबूजी आये और मेरी चुदाई करने लगे. बहुत मजा आ रहा था.
पर आखिर में मेरे से रहा नहीं गया और मेरे मुंह से निकल गया- बाबूजी मैं रमा हूँ.
उन्होंने तुरंत कहा- साली, कल जब तेरी चुदाई हो रही थी तो तभी बता देती कि मैं रमा हूँ.
मैंने कहा- बाबूजी, आप बहुत जोश में थे. मैं शर्म के मारे चुप रही क्योंकि तब तक आप मेरे अंदर आ चुके थे.

और कहानिया   कैसे में जीजू की रंडी बानी

उन्होंने कहा- रमा तो फिर आज ये शर्म क्यों?
मेरे पास कोई जवाब नहीं था उनकी बातों का।

“अब चुपचाप पड़ी रह … मेरा मूड बना हुआ है!”
और फिर बाबूजी ने मेरे गालों पर हल्के से दांतों से काटा. आह … क्या साला बुड़का मारा!

अब तो मैं रातों में सिसकारियां भी भरने लगी थी जो भाभी सुनती थी.

एक दिन भाभी की पिलाई होती थी और अगले दिन मेरी।

और एक दिन तो मेरी पिलाई हो रही थी और भाभी आ धमकी और लाइट जला दी.

हम दोनों बाप बेटी पानी पानी हो गए. बाबू जी ने खिसिया कर अपना लौड़ा मेरी चूत से बाहर निकाला तो मैं हैरान हो गयी.
आह … साला काले रंग का कोबरा था बिल्कुल … 7 इंच लम्बा लौड़ा और दो इंच मोटा लण्ड!

भाभी ने कहा- पापा जी … अरे करते रहो न, बेचारी को मजा आ रहा था.
और भाभी वहीं बगल में लेट गयी.

भाभी ने लाइट बंद कर दी और उसी बिस्तर पर बाबूजी मेरे साथ कामक्रीड़ा करते रहे.

जब बाबूजी ने मेरी चुदाई कर ली तब उन्होंने अँधेरे में ही कहा- इस काम में जिसने शर्म करी, वो मजे नहीं ले सकता।
तब भाभी ने उन्हें बता दिया कि रमा ने हमें देख लिया था और इसका भी इच्छा हुई, क्योंकि इसे भी इसका पति ऐसे मजे नहीं देता जैसे आप हम दोनों को देते हो।

भाभी ने पूछा- पापा जी, आपको ज्यादा मजा किसके साथ आया?
उन्होंने कहा- तुम दोनों तो मेरी जान हो. यह पूछने की क्या जरूरत है तुम्हें?

भाभी ने कहा- पापाजी, आपको पता नहीं चला रात को कि यह आपकी बेटी है?
उन्होंने कहा- जब मैंने इसकी फुद्दी पर हाथ फेरा तो मुझे इसकी झांटें बड़ी लगी जबकि तुझे तो मैं रोज ही रगड़ता हूँ। पर उस समय मैं बहुत मजे में था इसलिए चुपचाप रहा।

बाबूजी ने कहा- देख बहू, सच कहूं … बुरा मत मानना, तेरी चूचियां बहुत सॉलिड हैं और गांड रमा की बहुत सॉलिड है. और इसकी फुद्दी थोड़ी ढीली है, जबकि तेरी काफी टाइट है।

फिर बाबू जी ने कहा- आओ अब दोनों मेरे पास आओ.
और हम दोनों ने उनकी चौड़ी बालों से भरी छाती पर सिर रख दिया. उन्होंने हम दोनों को जकड़ा हुआ था और हमें पता नहीं कब नींद आ गयी.

Pages: 1 2 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *