कज़िन सिस की चुदाई भरपूर सेक्स का मज़ा

हेलो दोस्तो मेरा नाम पेपी है, मैं देहरादून का रहनेवाला हूँ, मेरी उमरा 41 यियर्ज़ हे.आज मैं आपको अपने जीवन की सच्ची कहानी बताता हूँ.बात उन दीनो की हे जब मैं स्टडीस के लिए देहरादून आया था और अपने मामा के यहाँ रह रहा था. मेरे मामा की 2 लड़कियाँ और 2 लड़के हैं.
मेरी कहानी मे मेरे मामा की सबसे बड़ी लड़की जिसका नाम मोना हे के साथ मेरे उन संबंधो की हे जिसे मैं और मोना के अलावा कोई नही जानता. उस वक़्त मोना की उमरा कोई 18 साल होगी और उस पर धीरे धीरे जवानी अपना रंग चड़ा रही थी.शुरुवत मे मैं मोना को टच करने की कोशिश करता रहा, उसने मेरी हरक़तों पर कोई गुस्सा जाहिर नही किया और ना ही कभी मामा मामी से इस बारे मे कहा.धीरे धीरे मेरी हिम्मत बादने लगी और एक दिन मैने उसकी च्चती को टच किया उसके नींबू के आकर से थोड़े बड़े बूब्स को हल्के से दबाया…

उसने कहा भैया यह क्या कर रहे हो.. मैने कहा पगली मैं तेरा बड़ा भाई हूँ और यह मेरा प्यार हे.. वो बोली ठीक हे… इसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मैं उसके बूब्स उसकी हिप्स को ना सिर्फ़ टच करता बल्कि प्रेस भी करता.. वो सिर्फ़ मुस्करा देती.. और रात मे मैं उसे सोच सोच कर अपने 5 इंच के लंड को शांत करने का प्रयास करता.. धीरे धीरे मेरी आग इतनी बदती गयी की मैं दिन रात उसे छोड़ने के बारे मे सोचता और मौके की तलाश करने लगा..आँखिर एक दिन वो शुभ घड़ी आ गयी.. उस दिन वो स्कूल नही गयी थी घर मे हम दोनो अकेले थे.. उसने स्कर्ट टॉप पहना था और वो अपने कमरे मे लेती थी.. इससे अच्च्छा मौका मुझे कैसे मिलता..मैं उसके कमरे मे गया और हिम्मत करके उसके बूब्स को दबाने लगा उसने कोई विरोध नही किया.. मैने उससे कहा मोना मैं आज तुम्हे और प्यार करना चाहता हूँ..

वो बोली भैया आपा रोज तो करते हो.. मैने उससे कहा पगली प्यार तो इससे और ज़्यादा होता हे.. और यह कहकर मैने उसकी थाइस मे हाथ लगाया और सहलाने लगा.. धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी छूट तक पँहूच गये.. उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की पर उस वक़्त मैं अपने ड्रीम क हर हाल मे पूरा करना चाहता.. मेरा लंड उससे मिलन को बेक़रार था.. मैने उसके विरोध को नज़र अंदाज़ करते हुए उसकी छूट को सहलाने लगा… धीरे धीरे शायद उसके अंदर की औरत जागने लगी और उसने अपने पैर फैला दिए…

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बस यही तो चाहिए था मुझे… मैने झट से अपनी पयज़ामा और उंदेर्बेार खोल दिया.. मेररा लंड फंफनता हुआ बाहर आ गया..मैने अपने लंड पर तहोक लगाया और उसकी छूट पर डालने के लाइ उसकी पँति खोली.. मुझे इस ब्बत का आंदज़ा नही था की उसकी छूट इतनी टाइट होगी.. मेरे अपने लंड को उसके अंडर डालने के प्रयास मे झाड़ गया और मैं उसके सील तोड़ने मे असफल रहा..इससे पहले मैं कोई और प्रयास करता मुझे लगा शायद कोई आ गया हे .. मैने दर के मारे वहाँ से निकल गया… मुझे काफ़ी दर लग रहा था..मैं सोचने लगा अगर मोना ने मामा मामी को बता दिया तो मेरा न जाने क्या होगा..मामा मामी के आने से पहले ही मैं वहाँ से अपने गाओं को चला गया..एक महीने मैं अपने गाओं मे ही रहा और यह जानने का प्रयास करता रहा की मोना के यहाँ सब ठीक जब मुझे लगा की मोना ने किसी से इस बात का ज़िकरा नही किया तो मैं वापस आ गया..,.

जब मैने मोना को धेखा तो वो मुझसे नज़रे चुरा रही थी..और उसका मेरे प्राट व्याहार एकडम नॉर्मल था… मुझे लगा की जितना भूका मैं हूँ उससे कहीं ज़्यादा शायद मोना हे.. उस रात मैने मोना को सोच सोच कर 4 बार अपने लंड को शांत किया और फ़ैसला किया की अबकी बार मैं ना सिर्फ़ उसकी सील तोड़ूँगा बल्कि उसे रंडी की भाँति छोड़ूँगा…इसे मेरा लक कहिए यह उसकी आग अगले दिन उसने बहाना बना कर स्कूल नही जाने का प्लान बनाया.. चूँकि मेरे मामा मामी दोनो जॉब करते थे आठ: मामा मामी और मोना के भाई बहन सब अपने अपने राज के रुटीन पर चले गये… घर मे सिर्फ़ मैं और मोना ही थे…कुच्छ देर बाद मैने देखा की मोना आज भी उसी तरह अपने बेड पर लेती थी उसने स्कर्ट टॉप पहना था…

मैं उसके कमरे मैं गया…उसके पास बैठा.. और धीरे से उसके बूब्स मसले.. उसके मूँह से हल्की सी आ निकिली… बिना कोई वक़्त गवान्ये मैने उसकी स्कर्ट . उसके टॉप ब्रा पँति उतार दिए.. मेरे सामने 16 बरस की वो कमसिन जवानी थी.. जिसके आयेज हर कोई भी अपना लंड थाम ले… इस बार मैने इतमीनान से उसे चूमना शुरू किया.. उसका कोई विरोध नही था… शायद पहेली बार मे उसने जो लंड की गर्मी महसूस की थी आज उसे पाने के लिए बेताब थी…उसकी वो टाइट छूट …

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मैने अपनी उंगली डाली तो वो आज गीली हो रही थी… मैने बिना वक़्त गवाएँ उसकी छूट को अपनी जीभ से लीक करना स्टार्ट किया…उसकी सिसकारी मुझे आज काफ़ी जोश दिला रही थी …फिर मैने धीरे से अपना लंड उसकी छूट मे लगाया और धीरे धीरे ज़ोर लगाने लगा… आज उसकी प्यासी छूट तो मेरे स्वागत के लिए तैयार थी…दो टतेन झटको मे मेरा 5 इंच का लंड उसकी छूट मे था.. वो हल्के हल्के कराह रही थी… उसकी छूट की गर्मी उसके बूब्स.. उसकी सिसकारी ने मुझे मदहोश सा कर दिया था.. मैं ज़ोर ज़ोर से झटके दे दे कर उसे छोड़ता रहा… करीब 10 मिनिट बाद जब मैं झड़ने लगा तो मैने अपना लंड निकाला.. इस बीच वो दो टीन बार झाड़ गयी…

मुझे आसचयरा हुआ की उसकी सील टूटने के कोई सिग्नल नही थे.. इस पर मैने उससे कहा ..बता कुटिया तू कहा से छुड़वा कर आई हे बता रंडी किससे तूने अपनी प्यास भुझाई….मोना बोली नही भैया मैने आपके अलावा कभी किसी को अपनी छूट नही दी हे… मेरा विस्वास करो प्ल्ज़..मैने कहा हट रंडी… तू ऐसे सच नही बताएगी … अब मैं रोज तेरी छूट को चेक करूँगा….मैने मोना को लगभग 7 साल तक छोड़ा.. उससे अपना लंड चुस्वाया हे उसकी गांद भी मारी हे….आज मेरी और मोना दोनो की शादी हो चुकी हे.. पर मेरा लंड आज भी उसकी छूट मे जाने को बेक़रार हे..मेरे ख्याल से उसका पति शायद नमार्द हे नही तो उस भोसदीवाले को चडीछुदाई छूट मे कैसे मज़ा आ सकता हे…मैं सोचता हूँ भले ही मोना मेरी ममेरी बाहें हे पर वो एकदम मस्त चूड़ी का आइटम हे…मेरा बस चले तो मे उसे सबसे चुड़वाओं…

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