ऑफीस दोस्त की बीवी के सात सुहग्रात

मैं घर मे घुसते ही बोला की- सिर ने आपसे मिलकर पोकछने के लिए बोला था अगर आपको कुच्छ चाहिए तो. तो उसने स्माइल देकर कहा अच्छा ठीक है. ऑफीस से आ रहे हैं तो तोड़ा आराम कर लीजिए फिर बतौँगी. श्वेता भाभी ने एक पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहन रखा था. वो पूरा टाइट फिट था. वो उपर से नीचे ता कयामत लग रही थी. उसने कहा- आप बैठो, मैं चाय बनती हूँ. मैने कहा नही भाभी आप क्यूँ परेशन होती हैं. कुच्छ समान लाना है तो बता दीजिए जल्दी से ला देंगे. तो स्वेता भाभी ने कातिलाना अंदाज मे अंगड़ाई लेते हुए कहा अभी इतनी भी क्या जल्दी है ड्यूवर जी अभी तो पूरी रात बाकी है. मैं अंदर से खुश हो गया. फिर भाभी चाय बनाने चली गयी.
लेकिन मेरा एग्ज़ाइट्मेंट मे बुरा हाल हो रहा था. मान कर रहा था की बस दबोच के छोड़ डालूं. लेकिन फिर भी मैने कंट्रोल रखा. मैं उनके बातरूम मे फेस वॉश करने गया.हाथ मुँह ढोने के बाद मैने टवल ढूँढा तो वो नही था.

फिर मैने बाहर निकल कर भाभी से पूचछा. तो स्माइल देते हुए बोली हन आज देर से सूखने के लिए डाला है, और फिर उसने अपना दुपट्टा उतरते हुए कहा – तब तक आप इससे कम चला लो. अब भाभी की चुचियाँ साफ दिख रही थी. गोल गोल और पूरी पुस्त. मैने दुपट्टा लेने के लिए किचन मे ही चला गया आंड उनके बगल मे ही अपना फेस पोच्छने के बाद खड़ा हो गया, उनके दुपपते को अपने गले मे लपेट कर. अब मैं और भाभी किचन मे खड़े थे लेकिन वो मुझसे नज़र नही मिला रही थी और ज़ोर ज़ोर से सांस ले रही थी जिसके कारण उसकी चुचियाँ भी उपर नीचे हो रहीं थी. मुझसे अब बर्दस्त नही हो रहा था. फिर भाभी कुच्छलेने के लिए पलटी तो उनकी चुचियाँ मेरे कंधे से तोकुह हुईं. अब मैने एक हाथ से उनको पकड़ लिया. उन्होने अपने आप को च्छुदाने की कोशिश की लेकिन कुच्छ बोला नही.

मैने उनको खिच कर अपने और करीब कर लिया. अब वो पूरी तरह से शांत थी. कोई प्रतिरोध नही था लेकिन आँखे झुकी हुई थी. मैने उनकी ठुड्डी की पकड़ के उनका चेहरा सीधा किया लेकिन फिर भी वो नज़र नही मिला रही थी. फिर मैने उनको तोड़ा और करीब खिचने को कोशिश की – तो भाभी ने झट से अपने आप को मेरे बाहों से अलग कर कहा- ये सब क्या है राजीव?

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मैने कहा- प्यार, मैं आपको बहुत प्यार करने लगा हूँ. तो वो हासणे लगी, बोला मैं – आपके प्यार का मतलब समझती हूँ, और अभी फोन लगौंगी आपके भाई को जिसने आपके उपर विश्वास करके भेजा है मेरे पास. योरों मेरी तो जान ही निकल गयी. लगा मेरे उपर किसीने 10 घड़ा ठंडा पानी दल दिया हो. मेरा एग्ज़ाइट्मेंट तो जैसे पल भर मे ही काफूर हो गया. भाभीने दूसरे रूम मे जाकर अपना फोन भी उठा लिया. मैं उनके पिच्चे ही गया और बोला- की आप तो बुरा मान गयी. मेरा कोई ग़लत इंटेन्षन नही था. मैं तो आपका बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ. तो भाभी ने फोन रख दिया और हंसते हुए बोली- बस एक धमकी मे प्यार का भूत उतार गया? मैं आवक रह गया एक पल के लिए मतलब ही नही समझ पाया. तब फिर भाभी ने कहा – मैं तुमको पहले ही दिन साँझ गयी थी जब तू जान . मेरे उपर गिरा था.

फिर मैने भाभी को बाहों मे उठाकर भींच लिया और उसके होठों को चूसना सुरू कर दिया. कुच्छ देर के बाद भाभी भी मेरे होठों को चूसने लगी और मुझमे और घुसती जा रही थी. लगभज् 15 मिनिट तक हुमलोगों ने एक दूसरे के होठों को जमकर चूसा. फिर भाभी बोली- मैने तो तुम्हारे लॅंड की दीवानी हूँ. उस दिन टच किया था आज चुसूंगई. मैने कहा सच. तो भाभी ने बोला हा आज तेरे लवदे की खैर नही. फिर मैने भाभी को उठाकर बेड पर रख दिया. भाभी भी मुझे कस कर भींची हुई थी और छ्चोड़ने का नाम ही नही ले रही थी. मैने भाभी के पूरे फेस पर किस करना सुरू किया. इसी दरमियाँ मैने भाभी का कमीज़ खिच कर उपर उठा दिया था.

फिर मैने ब्रा का हुक भी खोल दिया और भाभी की मस्त चुचियों से खेलने लगा. यार्रों मैं बयान नही कर सकता उन चुचियों की खूबसूरती- पूरी माखन. मैं तो पूरा बचा बन गया था. भाभी के निपल्स को मुँह मे लेकर चूस रहा था और भाभी मदमस्त आवाज़ें निकल रही थी- आ.. उन्ह…. उ फकर…. आ काट खाएगा क्या? अचानक भाभी ने मुझे पटक दिया और मेरे उपर चढ़ गयी. उसने बरी बरी से मेरे शर्ट के सारे बटन खोल दिए. मेरी गांजी भी निकल दी. फिर वो मुझे चूमने लगी. फोरहेआद से लेकर नाभि तक. जैसे हीं वो नीचे पहुचि उसने मेरे पैंट का हुक भी एक झटके मे खोल दिया और पैंट खींच कर बाहर निकल दिया. अब मैं अंडर वेर मे था. मेरा मोटा लॅंड अंडरवेर के पिच्चे से ही फाड़ने के लिए तैयार दिख रहा था.

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भाभी ने मेरा अंडरवेर भी एक झटके मे निकल दिया.अब मैं पूरा नंगा था. भाभी ने एक बार फिर से पैर से चूमना सुरू किया. लॅंड को उसने हाथ से कसकर पकड़ा हुआ था. फिर जैसे ही वो लंड के पास आई उसने लंड को मुँह मे ले लिया. लेकिन पूरा लंड उसके मुँह मे नही जा पा रहा था. वहीं से उसने मेरे लंड को अपने जीभ से चूसना सुरू कर दिया. यारों अब आवाज़ की बरी मेरी थी…. मैं बेड पर उच्छल रहा था और वो मज़े ले रही थी. लगभग 10 मिनिट मे मैं भाभी के मुँह मे झाड़ गया….. और मेरा लंड छ्होटा हो गया. अब भाभी ने एक बार फिर से मेरी होठों मे अपना होत दल दिया और स्मूच करने लगी. इससे लंड तुरंत ही फिर से टाइट हो गया. अब भाभी टाँगे खोल कर मेरे जाँघ के नीचे बैठ गयी. उसने अपने बर को आयेज किया और मेरे लंड को अपने बर मे घुसना चाहा. लेकिन उसके च्छेद मे मेरा लंड नही घुस पा रहा था. अब मुझसे रहा नही जा रहा था.

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