ऑफीस दोस्त की बीवी के सात सुहग्रात

ये दास्तान है मेरे दोस्त की बीवी की चुदाई का. मैं उस समय नॉइदा मे पोस्टेड था. मेरे ऑफीस मे एक प्रॉजेक्ट मॅनेजर था सुमन. वो मेरे ही प्रॉजेक्ट पर था इसलिए हमारे बीच अच्छी फ्रेंडशिप हो गयी थी. मेरा सीनियर था. भाग्या से वो मेरे ही सोसाइटी मे रहता था. धीरे धीरे उसके घर मेरा आना जाना सुरू हो गया था. उसकी बीवी से भी मेरी खूब पटती थी. शादी नयी नयी ही हुई थी. इसलिए भाभिजी भी फूल्लतू माल थी. लगभग 5’5? की हाइटआंड फिगर 34-36-34. गोरी चित्ति सी मस्त आइटम थी.

मेरे दोस्त ने नया नया फ्लॅट खरीदा था आंड मैं क्लोज़ फ्रेंड होने के कारण वहाँ इन्वाइट्स था हाउस वॉरमिंग पार्टी मे. भाभी जी जिनका नाम श्वेता था वो काफ़ी चाहक रही तीन. मेरे दोस्त को कुच्छ समान लाना था तो वो बाजार चला गया उसने कहा तुम इधर ही बैठो. मैं उसके घर पर ही रुक गया और टीवी देख रहा था. फिर अकहनक मैने सोचा की भाभी की ही कुच्छ मदद कर देता हूँ. मैं किचन मे गया तो भाभिजी फर्श की सफाई कर रही तीन. वो रेड कलर का निघट्य पहनी थी और नीचे झुकके सफाई कर रही तीन. मैने जैसे ही उनकी तरफ देखा तो वो मुस्कराने लगी आंड बोला की क्या बात है ड्यूवर जी? मैने कहा मैं खाली बैठा था तो सोच आपकी ही मदद कर देता हूँ. तो वो हासणे लगीं.

फिर अचानक ही मेरी नज़र उनके फेस से नीचे पहुचि तो मैं आवक रह गया. उनकी निघट्य का उपर का बटन खुला हुआ था और उसके अंदर से उनकी मस्त चुचियाँ दिख रही तीन. गोल गोल माखन जैसी उजली चुचियाँ देख के मैं आवक रह गया. मेरा लॅंड ठनक गया. भाभी जी शायद ताड़ गयीं आंड उन्होने अपनी निघट्य का बटन ठीक कर लिया. अब उनकी चुचियाँ नहीं दिख रही तीन. फिर वो अचानक से खड़ी हो गयीं आंड बोलीं की आपको मेरी मदद करनी है तो मेरा बर्तन अरेंज कर दीजिए. लेकिन बर्तन वाला रॅक भी अभी नही लगा था. मैने उनसे पूचछा की बर्तन का रॅक कहाँ है तो उन्होने बताया की बगल वेल कमरे मे है. मैने कहा ठीक है मैं उतार लेता हूँ.

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फिर मैं बगल वेल रूम मे गया तो भाभिजी भी आ गयीं बोलीं- रॅक बहुत उछा है आप चेर ले लीजिए मैं उसको पकड़ लूँगी. फिर मैने हेर पे चढ़ कर उनका बर्तन वाला रॅक उतरने लगा. भाभी जी ने चेर ज़ोर से पकड़ा था सात कर. धीरे धीरे वो मेरे और करीब सताती जा रही थी. . देर के बाद ही उनकी चुचियाँ मेरे पीठ पर सतने लगीं. दोस्तों मेरा 8 इंच लंबा लंड खड़ा हो गया. भाभी जी की चुचियाँ अब पूरी तरह से मेरे पीठ मे रग़ाद खा रही थी आंड मेरा हालत खराब हो रहा था. किसी तरह अपने उपर कंट्रोल करके मैने बर्तन वाला रॅक उतार लिया.

फिर मैं जैसे ही चेर से उतरने के लिए मुड़ा तो मेरा पैर स्लिप कर गया और मैं फिसल गया. भाभी पिच्चे खड़ी होकर मुझे पकड़े हुए थी तो उन्होने मुझे बचाने की कोशिश की . मेरे हाथ से बर्तन का रॅक छ्होट कर नीचे गिर गया. भाबी मेरे सामने खड़ी थी तो उन्होने रोकने की कोशिश की और मैं उनकी बाहों मे ही गिरा. उन्होने कस के मुझे पकड़ा ताकि मैं गिरु नही. इसी कोशिश मे मैं उनसे गले मिलने की पोज़िशन मे आ गया आंड उनसे पूरी तरह से चिपक गया. उनकी चुचियाँ अब मस्त मुझसे चिपकी हुई थी. दोस्तों मैं तो जैसे सातवे आसमान पे था. मेरा लंड जो अभी तक खड़ा था वो भी अब फुल फॉर्म मे आ चुका था.

भाभी ने मुझे ज़ोर से भिच लिया और कहा- राजीव आप ठीक हो. मैं कहाँ ठीक था यारों लेकिन हन मे सर हिलाया. तब भाभी ने पकड़ के मुझे बगल के बेड पर बैठा दिया. मेरे पूरे शरीर मे मानो बिजली दौर गयी हो. फिर कुच्छ देर के बाद मैं नॉर्मल हो गया तो बर्तन का रॅक उठाकर उनके किचन मे फिट करने चला.

जैसे ही मैं कटी थोक कर बर्तन के रॅक को फिट करने चला तो भाभी ने फिर से पिच्चे से आकर पकड़ लिया और बोला- कहीं आप फिर ना गिर जाओ. फिर से उनकी चुचियाँ मेरे पीठ पर टकराने लगीं और मेरा लॅंड एग्ज़ाइट्मेंट मे पैंट फाड़ने के लिए तैयार हो गया. फिर मई जैसे ही बर्तन के रॅक को फिट करके पिच्चे मुड़ा तो भाभी पिच्चे ही खड़ी थी एक बार फिर आमने सामने की टक्कर हो गयी. इस बार उनकी चुचियाँ मेरे सिने से टकराईं आंड मेरा लॅंड उनके कमर के नीचे. भाभी ने एक कातिलाना सी स्माइल दी. उसके बाद मेरा फ्रेंड आ गया आंड फाइनली उनका फंक्षन स्मूद्ली ख़तम हो गया.

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लगभग 4 दिन के बाद सुमन ने अपने कॅबिन मे मुझे बुलाया और कहा की – . मुझे . कम से बॉमबे जाना है एक दिन के लिए मैं कल थर्स्डे को जा रहा हूँ आंड सॅटर्डे को वापस हो जौंगा, तब तक तुम प्रॉजेक्ट का ध्यान रखना. मैने कहा ठीक है. फिर जैसे ही मैं उसके कॅबिन से बाहर निकल रहा था तो उसने कहा- सुन तेरी भाभी भी अकेली रहेगी उससे भी ऑफीस के बाद जाके मिल लिया करना. भाभी का नाम सुनते ही मेरे दिल मे गुदगुदी होने लगी.

उस दिन रत भर मैने श्वेता भाभी के नाम पर 4-5 बार मूठ मारा फिर मैने सोचा कहीं सच मे ऑपर्चुनिटी मिल जाए तो. तो मैने सरसो तेल से अपने लॅंड की मालिश कर उसको और मोटा बना लिया. आन साइज़ तोड़ा बढ़ ही गया था लगभज् 8.5?. दूसरे दिन ऑफीस मे मेरा मान एकद्ूम नही लग रहा था. मान कर रहा था जल्दी से भाभी के पास पहुच जौन. आख़िरकार शाम के 6:30 मे ही मैं ऑफीस से निकल गया. 6:50 तक मैं भाभी के सोसाइटी मे था. मैने दरवाजे पर पहुच कर कॉल बैल बजाया. लगभज् 5 मीं के बाद श्वेता भाभी ने दरवाजा खोला लोहे के दरवाजे के पिच्चे से. मुझे देखते ही खुश हो गयी अरे राजीव? आइए. फिर उसने लोहे का जालीदार दरवाजा खोला.

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