पूरा परिवार ही छुडास है 2

तब रजनी जी बोली- वो तो ठीक है, लेकिन अभी तो लग रहा था कि मेरी गांड फटी जा रही है, और मुझको अब पिशाब भी करना है।’ रमेश अपनी सास कि बात सुन कर उषा से बोला- उषा तुम जलदी से किचन में से एक जग लेकर आओ और उसको अपनी मां की चूत के नीचे पकड़ो।’ उषा जल्दी से किचन में से एक जग उठा कर लाई और उसको अपनी मां की चूत के नीचे रख कर मां से बोली- लो अब मूतो, मेरी प्यारी मां। तुम भी मां एक अजीब ही हो। उधर तुमहरा दामाद अपना लंड तुम्हारे गांड में घुसेड़ रखा है और तुमको पिशाब करनी है।’ रजनी जी कुछ नहीं बोली और अपने एक हाथ से जग को अपनी चूत के ठीक नीचे लकर चर चर करके मूतने लगी। राजनी को वाकई ही बहुत पिशाब लगी थी क्योंकि जग करीब करीब पूरा का पूरा भर गया था।

जब रजनी जी का पिशाब रुक गया तो उषा ने जग हटा लिया और जग को उठा कर अपने मुंह से लगा कर अपनी मां की पिशाब पीने लगी। यह देख कर रमेश रजनी जी से बोला- अरे क्या कर रही हो, थोड़ा मेरे लिये भी छोड़ देना। मुझको भी अपने सेक्सी सास कि चूत से निकला हुअ मूत पीना है।’ उषा तब बोली- चिंता मत करो, मैं तुम्हारे लिये आधा जग छोड़ देती हूं।’

थोड़ी देर के बाद रजनी जी अपने दामाद से बोली- बेटा मैं फिर से तैयार हूं, तुम मुझे आज एक रण्डी की तरह चोदो। मेरी गांड फ़ाड़ दो। मैं बहुत ही गर्म हो गई हूं। मेरी गांड भी मेरी चूत कि तरह बिल्कुल प्यासी है।’ ‘अभी लो मेरी सेक्सी सासुमा, मैं अभी तुम्हारी गांड अपने लंड के चोटों से फ़ाड़ता हूं’ और यह कह कर रमेश ने अपना लंड फिर से अपने सास कि गांड में पेल दिया। गांड में लंड घुसते ही रजनी जी फिर जोर से चिल्लने लगी- हाय! फ़ाड़ डाला रे मेरी गांड, फ़ाड़ डाला रे। अरे कोई मुझे बचाओ रे, मेरी दामाद और मेरी बेटी दोनों मिल कर मेरी गांड फड़वा डाला।’ तब उषा अपने मा से बोली- अरे मा क्यों एक छिनाल रण्डी की तरह चिल्ला रही हो, चुप हो जाओ और चुपचाप अपने दामाद से अपनी गांड में लंड पिलवाती रहो। थोड़ी देर के बाद तुमको बहुत मजा मिलेगा।’ अपनी बेटी कि बात सुन कर रजनी जी चुप हो गई लेकिन फिर भी उसकी मुंह से तरह तरह की आवाजे निकल रही थी।

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‘आआह्हह्ह… यययौऊ… ऊऊउफ़्फ़फ़… ईईइस्सा स्सास्सह्हह्हह… ऊऊओह्हह… यययौउ… ऊउफ़्फ़… यह… लंड बहुत मोटा और लम्बा है। ऊऊओमम्म्मा आआह्हह… है! मैं मरी जा रही हूं। ऊऊउह्हहह्हह… प्लीऽऽस्सासे… आआअ… ऊऊफ़्फ़फ़… धीरे… जरा धीरे पेलो मैं मरी जा रही हूं। अरे बेटी, अपने पति से बोल ना कि वो जरा मेरी गांड में अपना लंड धीरे धीरे पेले। मुझे तो लग रहा कि मेरी चूत और गांड दोनों एक हो जायेंगी।’ थोड़ी देर के बाद रमेश अपना हाथ अपने सास के सामने ले जकर उनकी चूत को सहलाने लगा और फिर अपनी अंगुलियों से उनकी चूत की घुण्डी को पकड़ कर मसलने लगा। अपनी चूत पर रमेश का हाथ पड़ते ही रजनी जी बिलबिला उठी और अपनी कमर हिला हिला कर रमेश के लंड पर ठोकर मारने लगी।

यह देख कर रमेश ने उषा से कह- देख तेरी रण्डी मां कैसे अपनी कमर चला कर मेरे लंड को अपने गांड में पिलवा रही है। क्या तुम्हारी यही मां अभी थोड़ी देर पहले अपनी गांड मरवाने पर नहीं चिल्ला रही थी?’ यह सुन कर उषा बोली- ओह्ह रमेश! क्या बात है! देखो मेरी मां क्या मज़े से अपनी गांड से तुम्हारा लंड खा रही है। देखो मेरी मां कैसे गांड मरवा रही है। मारो, मारो रमेश, मेरी मा कि गांड में अपना लंड खूब जोर जोर से पेलो। इसके पूरे बदन में लंड के लिये खुजली भरी पड़ी है। चोदो रमेश साली कि गांड मारो बड़ी खुजली हो रही थी!’

रजनी जी अपनी गांड में दामाद का लंड पिलवा कर सातवे आसमन पर थी और बड़बड़ा रही थी- ओह्हह्ह! देखो उषा मेरी बेटी! तुम्हारी मा गांड में लंड लेकर चुदवा रही है! तुम आखिर अपने मरद से मेरी चूत, गांड चोदवा ही दी! देखो साला रमेश कैसे चोद रहा है! साला सच्चा मरद है! डाल और डाल रे! चोद! मेरी गांड मार! मेरे बेटी को दिखा! आह्हह ऊह्हहह चोद चोद चोद ऐईइ!’

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रमेश अपनी बीवी और अपनी सास की बात सुनता जा रहा था और अपनी कमर चला चला कर अपनी सास की गांड में अपना लंड पेलता रहा। थोड़ी देर तक रजनी जी कि गांड मारने के बाद रमेश एक बार जोर से अपना पूरा का पूरा लंड रजनी जी कि गांड घुसेड़ दिया और रजनी जी को जोर से अपने हाथों से जकड़ कर अपना लंड का पानी अपने सास कि गांड ने छोड़ दिया। झड़ने के बाद रमेश ने अपना लंड अपने सास की गांड से बाहर निकाल लिया।

उषा ने अपनी मां को प्यार से गले लगा लिया। रमेश ने भी अपनी सासू मां के चरण स्पर्श किया और फिर तीनो साथ ही एक ही बिस्तर पर ये वादा करके लेट गये कि अब पूरे घर में ऐसा ही प्यार भरा माहौल बना रहे।

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