बहन की चुदाई औरत बना कर

मैं जब जवान हुआ तो बड़ी दिक्कत आने लगी, सला तर्की लंड को हमेशा एक्सर्साइज़ चाहिए था, जब मान चुप चुप क मूठ मरने निकल पड़ता, मेरी बहें जवान होने लगी, पहले तो वो नंगी नहाती थी, लेकिन एक बार मम्मी ने उसे टोक दिया की अब जवान हो गई हो बड़ा भाई घर मे है. तोड़ा शरम करो, अगले दिन से वो छुपा क नहाने लगी, मेरे तर्की नज़र को उसपे नज़र लग गया, धीरेन धीरे उसके मुममे बड़े होने लगे, मुझे अब उसे चुने की मचलन होने लगी, उसके मुममे को दबाने की मचलन, बहुत ज्यादà, सलवार सूट पहने लगी वो, मैने बातरूम मे मौका पके उसके डोर पे च्छेद क्र दिया था ताकि मैं उसे नहाते हुए देख सकूँ.

ये ख़याल मई हमेशा सोचता की मैं उसके साथ नाहोँगा तो पहले उसे पीछे से पकड़ लूँगा, उसके मुममे को पीछे से दबौंगा ओर लंड से उसके छूट पे छुओऊन.

उसके बाद उसके होतों को दाँतों मे दबा लूँगा, ओर शवर ओं करके उसके साथ नाहोँगा, पीछे से उसके छूट की उंगली करूँगा, उसके गर्दन मे हल्का हल्का होंठ फेरँगा, उसके नाभि पे किस करूँगा, ओर उसे तडपा दूँगा, उसके बाद जाँघो को चुमूंगा, धीरे धीरे हाथ से उसके निपल्स को सहलौंगा, उसके निपल्स को उंगली से दबौंगा फिर केचुँगा.

फिर निपल्स को ज़बान से सर्कल करूँगा, उसके बाद लंड से, फिर उसके छूट पे लंड फेरँगा, इतना टीज़ करने क बाद उसे लंड हाथ मे दे दूँगा, तो वो उसे सहलाएगी, फिर धीरे से अपने छूट मे डालेगी, इस दौरान शवर ओं रहेगा ओर हम फ्लोर ए लेट जाएँगे उन की वो मेरे उपर रहेगी, ओर मेरा लंड उसके छूट मे.

वो धीरे धीरे हिल हिल चूड़ेगी ओर हाथ मैं पकड़ लूँगा, फिर उसे किस करते हुए छोड़ूँगा, तो ये ज़्ब तो ख़याली पुलाओ थे जो कभी पूरा नही हुआ.

मेरी बहें अब 18 साल की हो गई थी, उसके मुममे 32 साइज़ क हो गए, ओर बहोट खूबसूरत लगता था जब वो स्कूल ड्रेस पहनती थी, शर्ट मे उसके मुममे बड़े दिखते थे, मान तो क्रटा था की अकेला पा के उन्हे पकड़ लूँ, बाद मे देखा जाएगा, लेकिन दर जाता, अब उसके जाँघ भर आए थे.

जब वो लेगैंग्स पहेनटी है तो मा कसम क्या गंद दिखता है उसका, सलवार उसके गंद पे आके पीछे की ओर उठ जाता है, ओर बीच मे फ़ासले से उसको मोटी जाँघ दिखती है, मैं तो अपना लंड दबाने लगता हूँ, रात मे जब वो सो जाती तो मैं उठता हूँ.

इससे पहले मैं बता दूं की मैने उसके बारे मे स्कूल मे पता लगता, तो पता चला की फ्रेंड सर्कल मे ज़्ब रंडी है ऑलमोस्ट, ओर लड़को से बातें करती है, उसकी एक सहेली का तो मधर्चोड़ 36 से कम नही होगा, बड़ी हवस की नज़रों से मुस्कुराती है, उसके घर तरफ भी बहुत चक्कर लगाया हुआ है, खैर, मेरी रंडी बहें स्कूल बड़ा साज-धहाज़ क जाती है.

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एक घंटा पहले से तैयारी होने लगती है, बाल तो मिनिट मिनिट पे झड़ती है, ओर भैसब जब साली क्लिप लगाने क लिए दोनो हाथ उठती टीबी लगता है की अब पकड़ ही लूँ, बहुत बड़ा हो जाता है उसके बूब्स, तो कंक्लूड मैने ये किया की साली को लंड चाहिए, तो मैं घर मे ट्राउज़र्स पहेन्ने लगा, लंड खड़ा क्र क उसके पास से गुज़रते, मतलब इतना की सिर्फ़ वो पोर्षन फूल जाए ओर पता चले की लंड मेरा बड़ा है.

मैं लंड खड़ा क्र क उससे आस पास मंडराता रहता, उससे बातें करता तो पता चला की उसकी आँकें लंड को अक्सर देखती थी, अब मैं कभी कभी उसके गंद पे हाथ रख देता हूँ, पीछे से आता हूँ ओर गंद पकड़ क हिला देता हूँ, वो कुछ न्ही बोलती.

हाँ तो रात मे उसके सोने का इंतेजर करते ओर हल्के से उठ क उसके पास आने की कोशिश करता, उसको पोज़िशन मे देख मेरा मान डगमगा जाता है, सलवार उसके मुममे की उभरे हुए रहता ओर जाँघ की तो बात ही नही, बहुत मोटा, गंद भी खुला रहता है, मतलब की सलवार हट जाता है, ओर मैं डरे हुए धीरे धीरे उसके जाँघ पे हाथ फेरता हूँ.

फिर उसके मुममे पर हाथ रखता हूँ, ऐसे जैसे की सोते हुए ग़लती से रखा गया, फिर खूब दबाता हूँ, ओर इधर तकिया क खोल मे अपना रस निकालने की कोशिश मे लगा रहता हूँ, मेरी यही कोशिश रहती है की वो किसी तरह से जोश मे आ जाए मेरी हरकतों से ओर मैं सिचुयेशन महसूस कर क छोड़ दूं, या फिर अगले दिन क लिए रिज़र्व कर लूँ, वो अक्सर जाग जाती थी.

लेकिन किसी से कुछ बोलती न्ही है, कभी कभी उसके मुममे दबाता हूँ तो गया देती है, मैं चुपचाप दर क मारे सो जाता हूँ, कभी कभी जब उसके निपल्स क साथ हरकत करता हूँ तो कुछ नही करती ओर मुझे लगता है की मज़े ले रही है, कभी मैं उसके हाथ मे लंड खड़ा कर क रख देता हूँ, ओर मेरा लंड गरम होते रहता है.

हल्के हल्के हिल क उसे महसूस भी करता हूँ की लंड है मेरा कुछ तो करो अब, लेकिन कोई हरकत नही, हालाँकि वो जाग जाती, कुछ देर लंड वैसे ही रखा रहता ओर वो धीरे से हाथ निकल लेती है, कभी उसके छूट पे उपर से उंगली फेरता.कभी पीछे से तो कभी उपर से, सोने क पोज़िशन पे डिपेंड करता है, उपर से छूट को सहलाने मे बड़ा मज़ा आता है.फूला हुआ सा रहता है, लेगैंग्स ओर पनटी क वजह से अंदर उंगली नही घुसा पाते.

एक बार तो सला अज़ीब हुआ, अपने पे गुस्सा आता है, कुछ रेस्पॉंड नही करती थी ओर नाही कुछ बोलती थी, तो एक रात काम चला था मेरा, फॉर्चुनेट्ली, वो मेरे पॅरलेल मे ही सो गई थी.

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अछा एक बात बता दूं की मचरदानी का टाइम है, ओर 2 बेड पे पूरा परिवार सोते थे, एक पे पापा ओर एक पे बाकी लोग, हमारा बेड दो बेड से बाबा था, सता हुआ, तो मैं एक तरफ ओर मम्मी बहें दूसरी तरफ, इसी मे ये ज़्ब खेल होता था.

हाँ तो वो पॅरलेल थी मेरी, मैं उठा, उसका ओढनी दूसरी तरफ हो गया था, तो उसके मुममे सॉफ बड़े बड़े नज़र आ र्हे थे, मैने उसके मुममे पर हाथ फेरना स्टार्ट किया, मैं जनता था की कुछ होगा नई तो लंड शांति दे देता हूँ.

इधर उसके निपल्स को दबाने मसालने ओर खेचने लगा ओर तकिया का खोल मे मैं हॅंड प्रॅक्टीस कर रा था, मुझे महसूस हुआ की बहें मेरी उठ गई है, ओर जैसे जैसे मैं उसके निपल से खिलवाड़ कर रा था वो अराउज़ हो रही थी, ओर अब मैं बेझिझक उसके मुममे दबाने लगा, ओर इधर लंड का सेवा भी चालू था.

अब कितना देर तक चलता ये, मैं जो चाह रहा था वो आज हो रहा था, बहें रंग मे आ रही थी, मैं धीरे धीरे उसके निपल से उसके छूट पे आ के पूरे सरीर मे आग ल्गा देता ओर वो चूड़ने को तैयार हो जाती, अब उसके बाद जब मौका मिलता मैं उसे छोड़ सकता था, स्कूल ड्रेस मे उसके मुममे को दबा सकता था, कभी भी किस कर सकता था, बेझिझक अकेले मे उसके गंद का पोस्ट-मोर्टें कर सकता था, उसके छूट पे हाथ फेरता सकता था.

लेकिन सला लंड कितना देर रुके, मूठ निकल गया ओर मैं किसीस काम का ना रहा, अब मुममे से हाथ हटा कर सो गया मैं, अब मान नही कर रा था कुछ करने को, मेरी प्यारी बहें उसी हालत मे सरीर अकड़ कर लेती रही, मैं सोने लगा, तब वो मेरी तरफ देखी फिर उठ क बातरूम चलो गई ओर 5 मिनिट बाद लौटी.

इतना अच्छा मौका मिला वो भी मैने गावा दिया, हर रोज़ थोड़े ही ऐसा मौका मिलता है, अपने तर्की लंड की बेसब्री को कोस्टा हूँ.

कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कॉमेंट सेक्षन मे ज़रूर लिखे, ताकि डेसिखहनि पर कहानियों का ये डोर आपके लिए यूँ ही चलता र्हे.

इतना ही हुआ, अब मैं बाहर पढ़ने आ गया हूँ, वो राते रह गई याद बनके, जिसको याद कर करके अब मूठ ही मार सकता हूँ, ओर अब फोन पे बात होती है तो वही बहें जैसा. हिन्दी सेक्स स्टोरी

आप लोग बताइए अब क्या करना चाहिए उसे छोड़ने क लिए, मैं जनता हूँ की उसकी भी उमर वैसी थी, उसको भी मान करता है, 2 साल ही गया, क्या अब भी मैं उसे च्छू पौँगा, क्या वो अब अलो करेगी, या बोल देगी मम्मी से, क्या करू, मुझे छोड़ना है उसे, सही सजेशन दे.

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