Category «antarvasna»

बस में कंडक्टर से जमकर चुदाई

मेरा नाम सुहानी शाह है और मैं अहमदाबाद के रखियाल में रहती हूँ. अपनी जॉब के लिए मैं डेली लोकल बस में अप डाउन करती हूँ. वैसे मेरी इवनिंग की बस फिक्स नहीं है. लेकिन मोर्निंग में घर के सामने के स्टॉप से मैं सुबह 10:20 बजे वाली बस में ही होती हूँ. और इस …

सुहागरात में किसी और से चुदाई

मेरा नाम जगजीत सिंह है। पंजाब के मालवा इलाके का जमींदार। जमीन बहुत है, बहुत से नौकर-चाकर खेतों में और हवेली में काम करते हैं। सेक्स करने के लिए एक से एक छोकरी, औरत हर समय तैयार मिलती है। मेरा एक ख़ास नौकर है – राजा ! नौकर ही नहीं, एक तरह से वो मेरा …

मुंबई की यादगार सफर भाग 2

मैं थोड़ा और नीचे खिसक कर उसकी नाभि के पास आया और मैंने उसकी नाभि के चारों तरफ अपनी जीभ चलाना शुरू कर दी। मेरी जीभ जैसे ही उसकी नाभि पर गई वो तो उछल गई, उसने हाथों से मेरे बालों को नोचना शुरू कर दिया और अपने पैरों को मेरी पीठ पर लपेट लिया। …

मुंबई की यादगार सफर

आपके काफ़ी ईमेल मिले तथा तीन सौ से अधिक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली, मेरा दिल खुश हो गया। मैंने लगभग हर मैसेज और मेल का जवाब देने की कोशिश की है पर अगली कहानी शुरू करने के पहले मैं कुछ बात आपसे करना चाहूँगा जो आप सभी के कुछ सवाल हैं और उनका जवाब है। …

कैसे दोस्त ने मेरी बेहेन की सील थोड़ी भाग 2

मैं हैरान होता अलग हुवा तो रमेश भी उसकी चुचियों से मुँह हटा बोला, “क्या हुवा सपना?” “ओह्ह भाय्या आपके दोस्त तो बिल्कुल बुद्धू हैं. इनको तो लड़की को मज़ा देना आता ही नही. ना तो यह चुचियों को ही चूसना जानते है और ना ही चूत को चाटना. इतनी देर से चाट रहेहै पर …

ड्राइवर से चुदाई भाग 3

मेरा केवल सुपाड़ा ही घुस पाया की वो चिल्लाने लगी और अपना सर इधर उधर पटकने लगी. मिनी ने अपने होठ उसके होठ पर रख दिए. अब उसके मूह से केवल गू गू की आवाज़ें निकल रही थी. मैने एक झटका और दिया तो काजोल अपने सर के बाल नोचने लगी. मेरा लंड अब उसकी …

ड्राइवर से चुदाई भाग 2

मेम साहब की बड़ी लड़की का नाम मिनी था और उसकी उमर लगभग 18 साल की थी. अब मेरी निगाहें उस पर थी. वो भी अपनी मा से ज़्यादा सेक्सी थी. उसकी कमर इतनी पतली थी की मुझे लगता था अगर पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया जाए तो वो उसकी गांद के रास्ते …

ड्राइवर से चुदाई भाग 1

मेरा नाम राम कुमार है लेकिन सब मुझे रामू के नाम से पुकारते हैं. मैं एक सरकारी ऑफीसर के घर 5 साल से ड्राइवर की नौकरी कर रहा हूँ. साहब का नाम अमित मिश्रा है. वो दूसरे ज़िले में ड्यूटी करते हैं और वहीं रहते भी हैं. वो केवल सॅटर्डे को आते हैं और मंडे …

ये उन दिनों की बात है भाग 4

मेरे घण्टी बजाते ही दरवाज़ा खुला.. मुझे ऐसा लगा जैसे माया घंटों से मेरे आने का इंतज़ार कर रही हो। दरवाज़ा खुलते ही मेरी नजर माया पर पड़ी जो कि बला की खूबसूरत लग रही थी। मैंने आज उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक महसूस की.. जो कि शायद उसकी वर्षों बाद यौन-लालसा की …

ये उन दिनों की बात है भाग 2

मैंने उनकी छाती की ओर इशारा करते हुए बोला- अभी यहाँ आप सफाई कर लेंगी या मैं ही कर दूँ? तो बोली- तू ही कर दे.. मैं उनसे और सट कर खड़ा हो गया जिससे मेरे लण्ड की चुभन उनकी गाण्ड के छेद ऊपर होने लगी और मैं धीरे-धीरे साफ़ करते-करते मदहोश होने लगा। शायद …