बस के सफर का मजा चाची के साथ भाग -1

नमस्कार दोस्तों दोस्तों आज की यह कहानी बस के सफर का मजा चाची के साथ काफी खास है यह कहानी आपको कैसी लगी यह आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। तो चलो इस कहानी को शुरू करते हैं दोस्तों मेरा नाम राहुल है मैं अपने चाचा चाचा के साथ मुंबई में रहता हूँ।

मैंने अभी अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की है और अब मैं ग्रेजुएशन करने की सोच रहा हूँ। यह घटना मेरे साथ थोड़े दिन पहले ही हुई। मैं अपने  चाचा चाची के साथ सोता था।  मैं पिछले 4 साल से अपने चाचा चाची और उनकी बेटी के साथ  मुंबई में रहता हूँ।

मेरी चाची का नाम गायत्री है और वह दिखने में बहुत खूबसूरत हैं। मेरी चाची को देखकर मुझे लगता ही नहीं है कि उनकी उम्र करीब 40 साल की होगी। चाची मुझे अपने बच्चे जैसा ही मानती है और उनके अपने बच्चे की तरह ही मेरा ख्याल रखती है।

मेरे चाचा एलआईसी कंपनी में एलआईसी एजेंट है जिसकी वजह से वह ज्यादातर शहर से बाहर ही रहते हैं। मेरी चाची घर में ही रहती है और उनकी बेटी अभी पढ़ रही है वैसे तो उनकी बेटी मुझसे उम्र में करीबन 3 साल बड़ी है।

उनकी बेटी किसी वजह  पेपर में पास नहीं हो पाई थी तो अभी भी बारवीं  कक्षा में है। वैसे तो चाची और उनकी बेटी दोनों ही दिखने में बहुत खूबसूरत है।

दोस्तों मैं कुछ दिन पहले अपनी चाची के साथ दिल्ली आया था ।यह सिलसिला जब शुरू हुआ जब चाचा ने मुझे कहा कि अपनी चाची को लेकर दिल्ली जाना है क्योंकि चाची के भाई के लड़की की शादी दिल्ली में ही थी।

चाची चाहती थी कि उनके पति और उनकी बेटी उनके साथ ही जाए लेकिन मेरी बहन का एग्जाम होने की वजह से वह नहीं जा पाई और चाचा भी काम पर व्यस्त है तो चाचा ने मुझसे कहा कि तुम चाची के साथ दिल्ली चले जाओ।

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पहले तो मेरा जाने का मन नहीं था फिर मैंने सोचा कि घर पर बैठे-बैठे भी बोर होना है चलो फिर इसी बहाने थोड़ा घूम भी आऊंगा। इसलिए मैंने चाची के साथ जाने के लिए आ कर दी। अब हमें ट्रेन की टिकट भी नहीं मिल रही थी मैंने बहुत बार ट्रैन की टिकट बुक करने की कोसिस की वो हर बार कैंसिल हो जाती हैं।

अब हमें जाना भी जरूरी था तो हमने सोचा कि हम बस से ही चले जाते हैं। मैंने अपने दोस्त को बस के टिकट बुक करने के लिए कहा तो उसने बताया कि थाने जाने के लिए बस कि सिर्फ एक सिंगल सीट नहीं है उसमें जुड़वा सीट मिलेगी।

मैं चाची के साथ एक ही सीट पर साथ में बैठकर नहीं जाना चाहता क्योंकि मैं रात में मोबाइल भी इस्तेमाल  करता और कुछ वीडियोस देखता था तो तब मुझे नींद आती थी। अब मेरे सामने मुश्किल यह थी कि सिंगल सीट कोई बची नहीं थी और ज्वाइंट सीट भी दो ही बची हुई थी।

हमें किसी भी हाल में दिल्ली पहुंचना था। यह तो मौके की मजबूरी थी तो मुझे मजबूरन बुक करानी पड़ी। अब हमारी टिकट और सीट कंफर्म हो गई थी पर मैं अभी भी उदास था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मैं अपनी चाची के साथ बैठकर जाऊं।

मुझे तो लग रहा था की चाची के साथ अब मेरे सफर का मजा खराब होने वाला था। मैं घर पर वापसी आया और चाची को बोला हमें आज रात को ही जाना है। रात करीब 8:00 बजे हमारी सारी पैकिंग पूरी हुई और हमें 10:00 बजे करीब निकलना था।

मेरा तो मूड ऑफ था क्योंकि चाची तो मेरे साथ बैठने वाली थी। खैर हम बस में बैठ चुके थे और हमें करीबन 2 घंटे हो चुके थे बस में बैठे हुए हैं और रात के 12:00 बज चुके थे और मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मुझे आदत पड़ गई थी की पहले वीडियो देखता फिर सोता।

अब चाची भी सो गई थी और मेरा मन बार-बार करवटें बदलने को हो रहा था क्योंकि मुझे नींद तो आ नहीं रही थी। एकदम से मुझे पता नहीं क्या हुआ पर मेरा दिल कर रहा था कि मैं ऐसे ही वीडियो देखो देखूं। फिर मैं थोड़ी सी वीडियो देख रहा था तभी चाची उठ गई तो मैंने एकदम फोन की लाइट बंद करो और सो गया।

कुछ देर बाद बस बस स्टैंड पर हूं कि ताकि हम लोग फ्रेश हो सकते हैं हमें लगा कि हम पहुंच चुके हैं लेकिन अभी तक हम दिल्ली नहीं पहुंचे थे। दिल्ली पहुंचने के लिए तो बहुत समय बचा हुआ था। हम सब फ्रेश होकर आए कुछ खा पी कर बस में वापसी बैठ गए।

बस वाले ने फिर बस स्टार्ट करि और हम वहां से चल पड़े। अब हमें नींद तो आ रही थी लेकिन मेरा वीडियो देखने का बहुत मन कर रहा था चाची अब ऊपर सोने जा चुकी थी और मेरे को भी जाना था तो मैंने पहले चाची को बोला कि पहले मैं जाता हूँ अंदर की साइड फिर आप चढ़ना।

अब  हम स्लीपर क्लास में लेट गए थे और चाची मेरे बगल में सो गई थी। और चाची ने करवट दूसरी साइड ले रखी थी तो मैंने सोचा चलो इसी बहाने मोबाइल चला लेता हूँ और कुछ वीडियो देख कर फिर सो जाता हूं।

मैंने वीडियो देखना चालू किया तो चाची ने करवट बदली और मेरी साइड मुंह कर लिया पर वह भी सो रखी थी मुझे लगा चलो चाची को अब शायद गहरी नींद आ चुकी है तो मैं वीडियो देख लेता हूं।

मेरा लंड तो अब खड़ा हो चुका था क्योंकि मैं वीडियो देख रहा था और जैसा आपको पता ही है कि स्लीपर क्लास में उप सोने का कितनी जगह होती है। बिच बिच में एक दो बार मेरा खड़ा लंड  चाकी के टकराता और में झट से अपने मोबाइल की लाइट को बंद कर लेता।

मुझको तो पता भी नहीं चला कि चाची की नींद खुली हुई है और मुझे तो ऐसा लग रहा था की चाची गहरी नींद में है। मैं अपनी वीडियो देखने में मस्त था और मेरा हाथ मेरी जेब के अंदर मेरे लंड  को संवार रहा था।

चाची ने अपनी आंखें खोली मेरे पीछे तो शीशा लगा हुआ था तो  उसमें सब दिख रहा था की मैं कोनसी वीडियो देख रहा हूँ।

जानिए आगे क्या हुआ बस के सफर का मजा चाची के साथ भाग -2  में।

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