दीदी और उनके बॉस के सात थ्रीसम चुदाई

ये कहानी आज से ठीक दो साल पहले की है. मेरी दीदी जिनकी उमर सटैश साल की है. दीदी एक प्राइवेट ऑर्गनाइज़ेशन मे कम करती है. मई भी एक प्राइवेट कोम्पनी मे कम करते हू. दोनो अपने काम से खुस नही थे. मई अपने बॉस की तारीफ करता रहता था. मई भी उनके बॉस से एक बार मिल चुका था जब मई जीजा से मिलने उनके ऑफीस मे गया था. एक दिन मई अपने दीदी के रूम पर गया जो की पास मे था. जब मई वाहा पहुचा तो देखा की उनके रूम पर मेरे बॉस आगाए थे. उनके रूम पर पहुचा तो दीदी को थोड़ी ही देर बाद धीरे से दरवाजा खुला और वो अंदर आ गये.

उन्होने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया. वो बेड पर बैठ गये और उन्होने दीदी हाथ पकड़ कर उनको अपनी तरफ खीच लिया. रूम में एक नाइट लॅंप जल रहा था और लगभग अंधेरा ही था. दीदी ने उनसे बातरूम जाने को कहा और बातरूम चली गयी. बातरूम से बाहर आते ही उसने दीदी को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और दीदी के होतों को चूमने लगे. वो धीरे धीरे बीते करते हुए दीदी के लिप्स को चूसने लगे. दीदी को सयद बहुत शरम आ रही थी. वो दीदी के ज़ुबान को अपने मूह में ले कर चूसने लगे. दीदी एक दम पागल सी हो रही थी जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा हो. मुझे नहीं मालूम था की किस करने में भी इतना मज़ा आएगा. मैं सोचने लगा की जब किस करते देखने में इतना मज़ा आ रहा है तो चुड़वते हुए देखने मे कितना माज़ आ आता होगा. वो दीदी के ज़ुबान को चूसे जा रहे थे और उनके हाथ दीदी के पीठ पर चल रहे थे.

उन्होने दीदी को अपने हाथों में कस लिया और दीदी उनसे एक दम चिपक गयी. उनका गरम बदन और सांसो को सायद दीदी महसूस कर रही थी. फिर उनका बया हाथ दीदी के वेस्ट पर जा कर रुक गया और फिर दीदी के बाई चुचि पर आ कर रुक गया.
मेरी तो साँस ही रुकने लगी. दीदी पूरी तरह से काँप गयी और कसमसकर उनको हटाने की एक नाकाम सी कोशिश की, पर उन्होने डीदिको कस कर दबोचा हुआ था. उन्होने दीदी के फेस अपने हाथों मे लिया और दीदी के लोवर लिप्स को चूसने लगे. वो दीदी के लिप्स को कर्रेब 3-4 मिनिट तक चूस्ते रहे और दीदी बेताब होने लगी. उन्होने दीदी के हाथ को पकड़ कर अपने कंधे पर रखा और अपने हाथों में दीदी को लपेट लिया. दीदी की चुचियाँ उनकी च्चती से एक दम सात गयी. उन्होने अपने हाथों को दीदी के पीठ पर फिरना शुरू कर दिया. दीदी तो जैसे पूरी तरह से खो गयी. फिर उन्होने दीदी को दीवार की तरफ मूह करके खड़े होने को कहा. दीदी ने अपना मूह दीवार की तरफ कर लिया और दीदी की पीठ उनकी तरफ थी. उन्होने फिर दीदी के चूची पर हाथ रखा और दीदी के कान के नीचे जीभ से चाटने लगे. दीदी तो जैसे एक दम पागल सी होने लगी. फिर धीरे-2 उन्होने दीदी के नेक पर बाइट्स करनी शुरू कर दी और दीदी आहें बहरने लगी.

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उन्होने दीदी कान में कहा, “रानी मेरी जान, तू बहुत नमकीन है, ई लोवे योउ.” दीदी सिर्फ़, “सिर….” ही कह सकी. मैने महसूस किया दीदी के गांद के बीचो बीच उनका गरम लंड सता हुआ था. उन्होने कब अपना अंडर वेर उतार दिया मुझे जोश में पता भी नहीं चला. मुझे अब दर भी लगने लगा और अच्च्छा भी लग रहा था. मैं पूरी तरह से एग्ज़ाइट हो गया था. दीदी ने अपनी गांद को उनकी तरफ कर दिया ताकि उनका लंड ठीक से अड्जस्ट हो सके. उनके हाथ अब धीरे धीरे दीदी के सलवार के नाडे पर आ गया. उन्होने दीदी को किस करते हुए एक झटके में ही सलवार के नाडे को खोल दिया. दीदी की सलवार सरक कर नीचे ज़मीन पर गिर गयी.

उन्होने बिना देर किए दीदी की पनटी भी कस कर पकड़ ली और एक झटके में उतार दी. अब दीदी की नंगी गांद पर उनका लंड लगा हुआ था. मैं इतना जोश में आ गया था की मेरे लंड से पानी भी छ्छूट गया था. मैं उनका लंड देखना चाहता था लेकिन मेरा मूह तो उनके पीठ की तरफ था. फिर वो दीदी के कमीज़ को उपर की तरफ करने लगे. दीदी और जोश में आ गयी और दीदी ने सहूलियत के लिए अपने हाथ उपर की तरफ कर दिए. उन्होने दीदी के कमीज़ उतार दी. कमीज़ उतरने के बाद उन्होने पिच्चे से दीदी के ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से दीदी के ब्रा को उतार कर फेंक दिया. मैं उमंग से लाल हो गया. पहली बार किसी मर्द के सामने दीदी एक दम नंगी हो गयी थी. फिर उन्होने पीच्चे से दीदी के बूब्स को दोनो हाथों में पकड़ लिया और मसलने लगे. फिर उन्होने दीदी के निपल्स को मसलना शुरू किया तो दीदी सिसकारियाँ भरने लगी. उन्होने दीदी को दीवार के सहारे और दबा दिया. दीदी के गांद पर उनका लंड सता हुआ था और दीदी का दोनो बूब्स उनकी मुट्ठी में थे. वो उंगली औ र अंगूठे से दीदी के निपल्स को बेदर्दी से मसालने लगे. दीदी तो जैसे जोश में एक दम पागल सी हो रही थी. 10 मिनिट बाद वो दीदी को पकड़ कर बेड के पास ले गये और बेड पर बैठने को कहा. दीदी बेड पर बैठ गयी. उन्होने लाइट ओं कर दी. जैसे ही रोशनी हुई दीदी अपने बदन को च्छुपाने के लिए चादर को खींच कर अपनी तरफ करने लगी तो उन्होने वो चादर भी खींच कर फेंक दी.

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