भगवान् सबको ऐसी बेहेन दे

हेलो दोस्तों मेरा नाम मोनिका है मेरी छोटी बहन का नाम ज्योति है और  उस से छोटी बहन का नाम रानी है आज मैं अपनी एक सेक्स कहानी सुनाने जा रहे हो यह कहानी बहुत मजेदार है जब भी मैं उस वाकए को याद करते हो तो अभी मेरी चूत  गीली हो जाती है मेरा मन डोल जाता है मुझे लगता है कि काश वो रात फिर से आ जाए कैसे हम तीनों बहनों ने उस रात को मजे लिए थे दोस्तों मजा आ गया था आज मैं आपको भी अपनी यह बात शेयर कर रही हूं।

यह कहानी आज से 4 साल पहले की है उस समय में 22 साल की थी और मेरे से दोनों बहने एक 1 साल छोटी थी।  हम तीनों भरपूर जवानी में थे तीनों एका पर से एक थे हॉट मॉडल की तरह हम तीनों लगते थे मेरा एक छोटा भाई था वह लल्ला था बेकार था ना पढ़ाई करता था मन दिखाई करता था पर हम तीनों बहनों ने खूब पढ़ाई करें उस समय भी हम तीनों अपने क्लास में अब्बल आते थे.  मेरी मां एक दुकान चलाती थी पापा का एक छोटा सा बिजनेस था वही करते थे।

हम तीनों मिलजुल कर रहते थे पर एक जो सबसे ज्यादा बात खटकती थी वह यह थी कि मेरी मां थोड़ी पुराने ख्याल की थी और मेरे पापा भी मेरी मम्मी से हमेशा नीचे रहते थे यानी की मम्मी हमेशा डांटते रहती थी तो यहां पर मम्मी का चलता था मेरे पापा का नहीं चलता था पुराने ख्यालात की होने के कारण वह हम लोग को ज्यादा छूट नहीं देती थी फैशन में कोई कमी नहीं करने देती थी कपड़े एक से एक देती थी।   पर वह किसी लड़के से बात करने देना नहीं चाहती थी वह सोचती थी कि शायद हम लोगों को पटा लेगा और भगा के ले जाएगा इसलिए वह हमेशा अपने मन में यह सभी बातें सोचते रहती थी।

अब मैं सीधे कहानी पर आती हूं।

उस समय मैं दिल्ली किराए पर रहती थी।  मेरे सामने वाले मकान में एक लड़का रहता था वह भी करीब 22 साल का ही था वह दिल्ली में पढ़ाई करने आया था पर वह शादीशुदा भी था शायद जिस साल उसकी शादी हुई थी उसी शायद उसी साल हो दिल्ली आ गया था पढ़ने उसमें हम लोग बात नहीं करते थे बस घर में ही बात करते थे कि वह भैया हैं जो वहां रहते हैं पर एक दिन आश्चर्य हुआ जब उनके बीवी गांव से आ गई।  भैया आप पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी करने लगे थे और एक गांव की जो लड़की आई थी यानी कि उनकी बीवी वह सीधी साधी थी हम तीनों बहनों का भैया के बीवी के साथ दोस्ती हो गई अब जब भैया बाहर होते थे और मेरी मां दुकान पर जाते थे तो हम लोग कभी उनके घर चले जाते थे या वह मेरे घर आ जाती थी ऐसे वह घंटों बातें करते रहते थे धीरे-धीरे बात बड़ी भैया भी घर आने लगे।

मेरी मम्मी भी उनको काफी पसंद करने लगी मेरी मम्मी उनको बेटा कहते थे हम लोग भैया कहते थे।  ऐसा तीन चार महीने तक चला और भैया की वाइफ गांव चली गई क्योंकि वह प्रेग्नेंट हो गई थी और मम्मी मेरी पापा के साथ अलीगढ़ चले गए थे क्योंकि हम लोग ऐसे अलीगढ़ के ही रहने वाले हैं।  क्योंकि मेरे मामा जी का काफी तबीयत खराब था इसलिए मम्मी और पापा वही चले गए बोले कि थोड़ा टाइम लगेगा तुम लोग ठीक से रहना।

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दोस्तों एक दिन की बात है मैंने भैया को रात को अपने घर पर बुलाई के भैया आज खाना भी खा लेना खाना खाने करीब 9:00 बजे के करीब आए और हम लोग फिर बातचीत करने लगे बातचीत करते-करते रात के करीब 11:00 बज गए थे .  शनिवार का दिन था तो इसलिए जल्दी बाजी भी नहीं थी क्योंकि दूसरे दिन छुट्टी का दिन था मैंने उनको कहा कि भैया आप रात को यहीं सो जाओ अब आप क्या जाओगे सुबह जाना चाहते हम तीनो बहने चाहते थे वह रात को उस समय हम तीनों के मन में कोई बात नहीं थी ना तो चाहते थे कुछ.

रात को धीरे धीरे करके मेरे दोनों बहने सोने चली गई मैं और भैया दोनों बातचीत करने लगे बातचीत करते करते पता नहीं कहां से कहां घूमा और हम दोनों एक दूसरे के करीब आ गए वह मेरे करीब आकर बैठ गए उनको निहारने लगी और अब वह मुझे चूमने लगे पता ही नहीं चला मैं रोक भी नहीं पाई और धीरे-धीरे अपना हाथ,  मेरी चूचियों पर रख दिए।

और वह दबाने लगे यह मेरा पहला एक्सपीरियंस था किसी लड़के के द्वारा मेरे बूब्स को छूना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था बदन में आग लग गई थी ऐसा लग रहा था कि इससे अच्छा और कुछ दुनिया में हो ही नहीं सकता मेरी सांसे तेज चलने लगी थी मेरी सांसे गरम-गरम निकलने लगी थी मैंने होंठ सूखने लगे थे मैं मदहोश हो रही थी ऐसा लग रहा था कि यह कौन सा नशा है यह बिल्कुल नया था दोस्तों मेरे लिए धीरे-धीरे वो मेरे होंठ को चूसने लगे मेरे हाथों को पकड़ने लगे अपनी अंगुलियां मेरे अंगुलियों में फंसाने लगे मेरे बालों को सहलाने लगे मेरे गर्दन को चूमने लगे मेरे बूब्स को दे दे दे दे दबाने लगे मेरी सांसे तेज होने लगी मैंने दोनों बहनों को देखा तो वह दोनों सो चुकी थी वह खड़े हो गए मैं भी खड़ी हो गई और दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए अपने बेडरूम में चली गई।

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वहां जाकर उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए अपने भी सारे कपड़े उतार दें वह मेरे बूब्स को दबाने लगे मेरे निप्पल को उंगलियों से रगड़ने लगे मेरे होंठ को चूसने लगे दोस्तों उस समय मेरा होंठ गुलाबी हो गया था मेरे बूब्स तन गए थे आंखें लाल हो गई थी गाल गुलाबी हो गया था उन्होंने जब मेरी पेंटी खोलने शुरू की तो मुझे थोड़ा खराब लगा खराब का मतलब यहां पर यह है कि मुझे लाज लगने लगा,  मैं शर्म आ रही थी घबरा रही थी पर मुझे सेक्स करने का भी मन था तो मैं उनको मना नहीं की और फिर अपनी पेंटी को खोलने दिया जैसे ही उन्होंने मेरी बहन खोलें। मेरी चूत को देखकर वह देखते ही रह गए क्योंकि उसी दिन मैंने शेव की थी और बिल्कुल टाइट थी। क्योंकि मैं वर्जिन थी।

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