भाभी और बीवी के सात थ्रीसम चुदाई

हम लोग गाँव के रहने वाले हैं। हमारा गाँव शहर से पैंतालीस किलोमीटर दूर है। पास के ही एक शहर में भैया की शादी हो गयी। डॉली भाभी बहुत ही अच्छी थी और खूबसूरत भी। भैया की उम्र चौबीस साल की थी। वो उम्र में भैया से एक साल छोटी थी। मैं डॉली भाभी से उम्र में पाँच साल छोटा था। डॉली भाभी शहर की पढ़ी-लिखी और फैशनेबल युवती थीं।

शादी के बाद भैया की नौकरी एक बड़ी कंपनी में लग गयी। वो पटना में ही रहने लगे। वो खुद ही घर का सारा काम करते थे और खाना भी बनाते थे। जब उन्हें खाना बनाने में और घर का काम करने में दिक्कत होने लगी तो उन्होंने डॉली भाभी को भी पटना बुला लिया। मम्मी तो थी नहीं, केवल पापा ही थे। कुछ दिनों के बाद पापा का भी स्वर्गवास हो गया तो भैया ने मुझे अपने पास ही रहने के लिये बुला लिया। मैं उनके पास पटना आ गया और वहीं रह कर पढ़ायी करने लगा। भाभी पटना में रह कर बिल्कुल शहरी – माडर्न हो गयी थीं। वो खुद को कई किट्टी- पार्टियों और दूसरे सामाजिक सम्मेलनों में खुद को व्यस्त रखती थीं।

मैंने बी.ए. तक की पढ़ायी पूरी की और फिर नौकरी की तलाश में लग गया। अभी मुझे नौकरी तलाश करते हुए एक साल ही गुजरा था की भैया का रोड एक्सीडेंट में स्वर्गवास हो गया। उस समय मेरी उम्र इक्कीस साल की हो चुकी थी। अब तक मैं एक दम हट्टा कट्टा नौजवान हो गया था। मैं बहुत ही ताकतवर भी था क्योंकि गाँव में कुश्ती भी लड़ता था। मुझे भैया की जगह पर नौकरी मिल गयी। अब घर पर मेरे और डॉली भाभी के अलावा कोई नहीं था। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। मैं भी उनकी पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थी। डॉली भाभी को भी एक कंपनी में सेक्रेटरी की नौकरी मिल गयी थी और साथ ही उनको ही घर का सारा काम करना पड़ता था इसलिये मैं भी उनके काम में हाथ बंटा देता था। वो मुझसे बार-बार शादी करने के लिये कहती थी।

एक दिन डॉली भाभी ने शादी के लिये मुझ पर ज्यादा दबाव डाला तो मैंने शादी के लिये हाँ कर दी। डॉली भाभी की एक सहेली थीं जो की उनके मायके के शहर में ही रहती थी। उनकी एक चचेरी छोटी बहन थी जिसका नाम मिन्नी था। डॉली भाभी ने मिन्नी के साथ मेरी शादी की बात चलायी। बात पक्की करने से पहले डॉली भाभी ने मुझे मिन्नी की फोटो दिखा कर मुझसे पूछा, “कैसी है?”

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मैं मिन्नी की फोटो देख कर दंग रह गया। मैं समझता था की गरीब लड़की है, ज्यादा खूबसूरत नहीं होगी लेकिन वो तो बहुत ही खूबसूरत थी। मैंने हाँ कर दी। मिन्नी की उम्र अभी बीस साल की ही थी। खैर शादी पक्की हो गयी। मिन्नी के मम्मी-पापा बहुत गरीब थे। एक महीने के बाद ही हमारी शादी एक मंदिर में हो गयी।

शादी हो जाने के बाद दोपहर को डॉली भाभी मुझे और मिन्नी को लेकर पटना आ गयी। डॉली भाभी ने मिन्नी को अच्छे से नये कपड़े वगैरह में फिर तैयार किया और पास के एक ब्यूटी पार्लर में उसका श्रृंगार इत्यादि भी करवाया। घर पर कुछ पड़ोस के लोग बहू देखने आये। जिसने भी मिन्नी को देखा, उसकी बहुत तारीफ की। शाम तक सब लोग अपने-अपने घर चले गये। रात के आठ बज रहे थे। डॉली भाभी ने मुझसे कहा, “आज मैं बहुत थक गयी हूँ। तुम जा कर होटल से खाना ले आओ।”

मैंने कहा, “ठीक है!” मैंने झोला उठाया और खाना लाने के लिये चल पड़ा। मेरा एक दोस्त था — विजय। उसका एक होटल था। मैं सीधा विजय के पास गया।

विजय बोला, “आज इधर कैसे?”

मैंने उससे सारी बात बता दी। वो मेरी शादी की बात सुनकर बहुत खुश हो गया। हम दोनों कुछ देर तक गपशप करते रहे। हम दोनों ने एक-दो पैग भी पिये। मुझे चिंता नहीं थी क्योंकि डॉली भाभी इस मामले में काफी खुले विचारों की थीं और खुद भी कई बार ड्रिंक करती थीं।

विजय ने मुझसे कहा, “तुझे मज़ा लेना हो तो मैं एक तरीका बताता हूँ!”

मैंने कहा, “बताओ!”

वो बोला, “तुम मिन्नी की चूत को कुछ दिन तक हाथ भी मत लगाना। तुम केवल उसकी गाँड मारना और अपने आप को काबू में रखना। कुछ दिन तक उसकी गाँड मारने के बाद तुम उसकी चुदाई करना।”

मैंने सोचा की विजय ठीक ही कह रहा है। मैंने उससे कहा, “ठीक है, मैं ऐसा ही करूँगा!” उसने मेरे लिये सबसे अच्छा खाना जो की उसके होटल में बनता था, पैक करवा दिया।

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मैं खाना लेकर घर वापस आ गया। हम तीनों ने खाना खाया। डॉली भाभी ने मिन्नी को मेरे रूम में पहुँचा दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने रूम में बुलाया। मैंने देखा कि उनके पलंग के पास स्टूल पर एक शराब की बोतल खुली रखी थी और पास ही ग्लास में शराब भरी थी। मैंने पहले कभी भाभी के पास पूरी बोतल नहीं देखी थी। कभी अगर उन्हें पीने का मूड होता तो मुझसे कह कर पौव्वा या अद्धा ही मंगवाती थीं और वो भी हम दोनों शेयर करते थे क्योंकि हम दोनों को ही ज्यादा पीने की आदत नहीं थी।

मैंने कहा, “भाभी! ये क्या पूरी बोतल…? आप अकेले मत पी जाना… आपको कंट्रोल नहीं रहता…!”

वो बोलीं, “तू मेरी फिक्र मत कर… आज खुशी का दिन है… पर मैं ज्यादा नहीं पियुँगी… खैर तू ज़रूरी बात सुन…” और कहने लगी, “मिन्नी अभी छोटी है… उसके साथ बहुत आराम से करना!”

मैंने मज़ाक किया, “मुझे करना क्या है?”

वो बोली, “शैतान कहीं का! तू तो ऐसे कह रहा है की जैसे कुछ जानता ही नहीं!”

मैंने कहा, “मुझे कुछ नहीं मालूम है!”

डॉली भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले उससे प्यार की दो बातें करना। उसके बाद अपने औज़ार पर ढेर सारा तेल लगा लेना। फिर अपना औज़ार उसके छेद में बहुत ही धीरे-धीरे घुसा देना। जल्दी मत करना नहीं तो वो बहुत चिल्लायेगी। वो अभी बीस साल की ही है.. समझ गये ना!”

मैंने कहा, “हाँ… मैं समझ गया।”

डॉली भाभी ने कहा, “अब जा अपने कमरे में।”

मैं अपने कमरे में आ गया। मिन्नी बेड पर बैठी थी, मैं भी उसके बगल में बैठ गया। मैंने उससे पूछा, “मैं तुम्हें पसंद हूँ?” उसने अपना सिर हाँ में हिला दिया। मैंने कहा, “ऐसे नहीं, बोल कर बताओ।”

उसने शर्माते हुए कहा, “हाँ!”

मैंने पूछा, “कहाँ तक पढ़ी हो?”

वो बोली, “केवल इंटर तक।”

मैंने कहा, “मेरी डॉली भाभी ने मुझे कुछ सिखाया है। क्या तुम्हें भी किसी ने कुछ सिखाया है?”

वो कुछ नहीं बोली तो मैंने कहा, “अगर तुम कुछ नहीं बोलोगी तो मैं बाहर चला जाऊँगा।” इतना कह कर मैं खड़ा हो गया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं उसकी बगल में बैठ गया। मैंने कहा, “अब बताओ।”

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