बेगानी शादी मे बहेन की चुदाई

आब मैने एक बार फिर मैने एक हाथ उसकी जाँघ मे रह दिया और दूसरा हाथ आब भी मेरे उसके कंधे पर था माओका पाकर आब एक हाथ से जो की जाँघ पर रखा था पूरा मैने का पुअर बूब्स हाथ मे लिया और ज़ोर से दबा दिया वो मेरी ओर गुस्से देखने लगी मैने कहा क्या हुआ वो बोली बेहन को भी कोई ऐसे च्छेदता है, किसी ने देख लिया तो ? और मेरे हाथ को पकड़ लिया आब मैने उंगलिओ मे अपनी उंगलिया दल दी वो आब भी गुस्से मे थी मैने कहा यार कुछ नही हुआ और धीरे से बोला नाराज़ मत हो वो बोली सब के सामने ऐसा क्यों कर रहे हो ? मैने कहा सब बाचे हैं और अंधेरा हो चुका है. आब मेरा हौंसला और बढ़ गया आब मैं धीरे धीरे उसके बूब्स दबाने लगा और वो हल्का विरोध कर रही थी बोली के तुम्हारी आदत खराब हो गयी हा हहार पर भी तुम्हारी नज़रें मुझी पर रहती हैं, कहीं मम्मी पापा को शक हो गया तो बहुत बुरा होगा. इस तरहा हम घर पहुच गये.हुँने साथ मे खाना खाया वहाँ भी आइयर्षा साथ मे थी और किसी प्रकार का अलगावा नही था, कोई भाई बेहन पर शक भी नही करता.अब मैने आज रात को ही आइयर्षा की लेने की सोच रहा था पर मौका नही मिल रहा था कल शादी थी इसलिए सब जाग रहे थे और अपनी अपनी तैयार मे लगे थे पर मेरा मान अभी तक बेचैन था.इस बीच आइयर्षा ने कहा मैं कपड़े चेंज करके आती हू. ये उसने मुझे सुनते हुए कहा था. वो उपर जा रही थी तो मेी उसके बाल खाते भारी पिच्छवाड़े को ही देख रा था, मेरा तो लंड टन गया.उसने ज़रा पिच्चे मूड कर मेरी तरफ देखा, मेने आँख मार दी तो वो जीभ निकल कर मुझे चिढ़ते हुए उपर चली गयी मैं मौका पाकर उपर चला गया वाहा कोई नही था आइयर्षा जिस कमरे मे थी उसकी लाइट जल रही थी.मैं बाजू वेल रूम मे चला गया वाहा कोई नही था और आइयर्षा के बाहर निकालने का वेट करने लगा.जैसे ही आइयर्षा उस रूम से निकली मैने उसका हाथ पकड़ कर कमरे के अंदर ले आया वो बोली क्या है भैया,छ्चोड़ो मेरी कलाई. उसके चहरे पर बनावटी गुस्सा था वो बोली यहाँ क्यो लाए हो ? मैने कहा एक बात करनी है वो बोली क्या बात करनी है जल्दी कार्लो. मैने हिम्मत जुटा कर उसे बहो मे भर लिया वो कुछ कहती उसके पहले ही मैने उसके होतों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगा वो अपने आप को च्छूराने का नाटक कर रही थी पर मैने उसे कस कर पकड़ रखा था मेरे दोनो हाथ उसके कमर से होते हुए उसके भारी चूतादो पर जाम गये थे.वो अपने आप को च्छूदते का नाटक करते हुए बोली गाड़ी मे इतना सब किया तब भी जी नही भरा,मैने कहा उस से तो और प्यास बढ़ गई है.अब मैं अपने एक हाथ से उसका बूब्स दबाने लगा और दूसरे से नितंभो को दबाने लगा.उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली भैया अब जाने दो कोई आ जाएगा मैने कहा कोई नही आएगा और फिर से मैं उसका बूब्स दबाना लगा मेरा लंड अब ज़्यादा टन चुका था और आइयर्षा को छोड़ने को बेकरार था..वो च्छुरा कर जाने लगी आब मैने उसे पीच्चे से पकड़ लिया और अपना ताना हुआ लॅंड उसकी गंद पर गाड़ा दिया. इस समाए हम दोनो ने कपड़े पहन रखे थे पर मेरे खड़े लंड का अहसास उसकी मतवाली गांद को हो गया था. और आब दोनो हाथो को आगे लाकर उसके दोनो बड़े-2 बूब्स दबाने लगा क्या बूब्स थे उसके एकदम टाइट टाइट मेरे हाथो मे समा नही रहे थे.आइयर्षा बोलने लगी भैया छ्चोड़ दो ना कोई आगेया तो फस जाएगे.मैने कहा एक शर्त पर छ्चोड़ दूँगा कल मिलॉगी दिन मे? वो बोली कैसे मिलू कहा मिलू? मैने कहा एक प्लान है वो बोली ठीक है बता देना,अभी जाने दो कोई उपर ना आजाए, कल प्लान बता देना मैईएन होंटो का फिर किस लिया तो उसकी सिसकारी निकल गयी.वो बोली अब छ्चोड़ भी दो, सारा प्यार आज ही करोगे क्या, बाकी कल कर लेना. मैने कहा ठीक है फिर उसे छ्चोड़ दिया वो भाग कर बाहर चली गई और कुच्छ देर बाद मैं भी नीचे आ गया हम बातचीत करते सब साथ मे बैठे थे आइयर्षा की नज़र मुझ पर ही थी और मैं भी उस पर नज़र जमाए हुआ था.यूँ रात बीट गयी सूभ होगआई आज शादी थी और सूभ से ही रस्म रिवाज सुरू होगआय थे. लड़की वेल यही आकर शादी करने वेल थे तो बारात घर से ही निकले वाली थी समाए दोपहर का था.मैने आइयर्षा को समझाया जब बारात निकल जाएगी तब घर मे कोई नही होगा तब हम बारात के बीच से घर वापस आज्एगे फिर बारात भवन पहुचने मे टाइम लगेगा हम रास्ते मे फिर जाय्न कर लेगे किसी को कोई शक नही गॉगा उसने कहा ठीक है पर कोई रिस्क तो नही है. मैने कहा नही ज़रा भी नही.दोपहर की तेज धूप मे करीब 1 बजे बारात निकली प्लान के अनुसार मैं कुछ डोर जाने के बाद आइयर्षा को खोजने लगा पर वो नही मिले मैं आब किसी से पूछ भी नही सकता था.किसी को शक हो गया तो मुसीबत हो जएएगी.तब मैने बचो से स्टाइल से पूछा की मेरी बेहन आइयर्षा नही दिख रही उसको नचाओ बहुत आछा डॅन्स करती है बाचे बोले उन के सर मे दर्द हो रहा है वो नही आई मैं खुश हो गया की वो वही है मैं लोगो से नज़रे चुरता हुआ घर पहुचा और घर मे उस समाए कोई नही था मैं पहले कन्फर्म किया खाली एक दो कंवली ही थी वो सफाई कर रही थी मई झट से उपर पहुँचा देखा जिस कमरे मे आइयर्षा थी वाहा बाहर से टला लगा था.मैं एधर उहदार देखने लगा पर कुछ नही दिखा मैने सोचा ये गई कहा कही मूरख तो नही बना दिया. तभी खिड़की थोड़ी खुली और आइयर्षा ने फुसफुस्टे हुए कहा पीच्चे के दरवाजे से आजओ. मैं पीच्चे से कमरे के अंदर पहुचा.

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