कैसे एक बेहेन की प्यासी चुत को भाई के लुंड से प्यास भुजी

आज मैं हाजिर हूँ एक नई कहानी लेकर … बहुत समय से मैंने कोई कहानी नहीं लिखी क्यूंकि मैं काफी टाइम से चुदी नहीं हूँ न इसलिए!
अब तो मन करने लगा है कि एक बार और चुद ही लिए जाये!

मगर चुदने के लिए एक अदद लंड तो चाहिए ही … और उसी की कमी थी। और अभी तो मैं कॉलेज में ही पढ़ती हूँ तो ज़ाहिर सी बात है कि इतनी परिपक्व नहीं हुई हूँ कि किसी मर्द को पटा सकूँ, और उससे अपनी प्यासी जवानी की प्यास बुझा सकूँ!

हाँ … अन्तर्वासना पर कहानियाँ पढ़ पढ़ कर इतनी लुच्ची ज़रूर हो गई हूँ कि सच में चुदाई में कैसा मज़ा आता है, यह जानने के लिए मैंने अपनी कच्ची जवानी किसी के हवाले कर दी।
बेशक बहुत दर्दनाक अहसास था वो … पहली बार था इस लिए।
मगर एक बात ज़रूर थी कि बेशक पहली चुदाई तकलीफदेह थी, खून भी निकला मेरे … मगर फिर भी मुझे ये दर्द बहुत प्यारा लगा.

कुछ दिनों बाद मुझे फिर से उस दर्द को महसूस करने की इच्छा होने लगी। हालांकि अन्तर्वासना पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ कर मुझे इतना पता चल चुका था कि सेक्स में सिर्फ पहली बार ही दर्द होता है, उसके बाद नहीं। अगली बार के सेक्स में तो मज़ा ही मज़ा आता है।

और मैं यही सोच भी रही थी कि बेशक मेरा पहला सेक्स तकलीफ देह था, मगर फिर दर्द होने के बावजूद मुझे मज़ा भी तो आया था, इस बार तो दर्द भी नहीं होना था, इस बार तो मज़ा आना पक्का था।
मैंने अपने बॉयफ्रेंड से पूछा तो उसने अपने किसी एग्ज़ाम की बात कह कर थोड़े दिन रुकने को कहा।

मगर मुझे ऐसा अहसास हो रहा था कि मैं रुक तो बिल्कुल भी नहीं सकती थी, दिन रात मुझे मेरे तन बदन में लगी वासना की आग तड़पा रही थी। हर हैंडसम मर्द को देखते ही सोचती कि ये ही मुझसे पूछ ले “संस्कृति चुदवाएगी क्या?”
मगर ऐसा कैसे हो सकता था। मेरी कमसिन उम्र देख कर ज़्यादातर तो मुझे “बेटा, बच्चे” कह कर ही बात करते थे।

तो इतना तो पक्का था कि कोई मैच्योर मर्द तो मुझे मिलने से रहा, हाँ क्लास के एक दो लड़के बहुत आगे पीछे घूम रहे थे, मगर वो तो साले बिल्कुल ही बेकार से थे।
अब यूं ही किसी ऐरे गैरे को अपना आप नहीं सौंप सकती थी क्योंकि जब जब भी मैं अपने घर में शीशे के सामने नंगी हो कर खड़ी होती, तो मेरा दर्पण मेरे हुस्न की इतनी तारीफ करता मेरे चेहरे की, मेरे गोरे बदन बदन की, मेरे मम्मों की, मेरी चूत की, मेरे चूतड़ों की, मेरी जांघों की, मेरे पेटकी, मेरी पीठ की कि मैं खुद ही शर्मा जाती।

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खैर मैंने सोचा, इस तड़पती हुई जवानी को संभालने का एक ही तरीका है कि अपना दिमाग कहीं और लगाया जाए. और इस लिए मैंने सोचा कि कहीं बाहर घूम कर आया जाए।
तो मैंने अपने पापा से कहा- पापा, कॉलेज की छुट्टियाँ हैं, मैं सोच रही थी कि मैं बुआ जी के घर कुछ दिन लगा आऊँ।

पापा को भी कोई ऐतराज नहीं था तो उन्होंने मुझे जाने की इजाज़त दे दी।

बुआ मेरे शहर से बस थोड़ी ही दूर रहती है, बस में बैठ कर मैं एक घंटे में बुआ के घर पहुँच गई।

जब बुआ के घर पहुंची तो वहाँ देखा ताला लगा था, बड़ा परेशान हुई मैं!
सोचने लगी कि अब क्या करूँ?
मैंने अपनी बुआ के लड़के निखिल को फोन लगाया तो उसने बताया कि मम्मी पापा तो आगे किसी रिश्तेदारी में शादी में गए हैं, वो अपने कॉलेज गया हुआ है, बस थोड़ी देर में ही आ जाएगा।
मैं वहीं घर के बाहर बैठ कर इंतज़ार करने लगी.

करीब डेढ़ घंटे बाद निखिल भैया आए, आते ही पहले गले मिले, फिर सॉरी सॉरी करते हुये घर का ताला खोला तो हम अंदर गए।
मुझे पानी देते हुआ पूछा- तू कैसे आई?
मैंने कहा- भैया, मैं छुट्टियों में घर पर बोर हो रही थी, सोचा दो चार दिन आप लोगों के साथ बिता लूँ, मगर यहाँ तो सभी बाहर गए हैं।
निखिल बोला- अरे तू चिंता मत कर, मैं हूँ न, मम्मी पापा तो कल शाम तक आएंगे, तब तक हम दोनों भाई बहन मिल कर फन करेंगे।

मैं सोचने लगी ‘अरे निखिल भैया, जो फन मैं करना चाहती हूँ, वो तो तुम करोगे नहीं, तो फन क्या साला घंटा होगा।’
मगर चलो अब आ ही गई हूँ, तो सोचा के एक दो दिन रुक जाती हूँ।

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दोपहर का समय था, तो निखिल भैया मुझे अपनी बाईक पर बैठा कर बाहर ले गए, हमने लंच बाहर ही किया. और कुछ करने को तो था नहीं तो वैसे ही फिर मूवी देखने पीवीआर में घुस गए. मैं निखिल भैया के साथ चिपक कर बैठी, मैंने उनकी बाजू को अपनी दोनों बाजुओं के जकड़ रखा था, इस तरह मेरा एक मम्मा निखिल भैया की बाजू से लग रहा था.
मैं तो इस चीज़ को समझ रही थी, मगर मुझे लग रहा था कि निखिल भैया भी ये चीज़ समझ गए और वो भी बात बात में अपनी बाजू हिला हिला कर अपनी कोहनी से मेरे मम्मे को छेड़ रहे थे।
तभी मेरे मन में खयाल आया कि निखिल भैया भी काफी तंदरुस्त हैं, जिम जाते हैं, मसल वसल बना रखे हैं, अगर ये मेरे पे चढ़ जाए तो सच में तसल्ली करवा दे मेरी।
फिर सोचा ‘अरे नहीं … निखिल भैया तो मुझे अपनी छोटी बहन मानते हैं, वो ऐसा क्यों करेंगे कि लोग उन्हें बहनचोद बोलें।’

मगर किसी को क्या पता चलेगा अगर बंद कमरे में आज रात वो मेरा चूत चोदन कर दें। मैंने कौन सा शोर मचाना है, मैं तो खुद ही अपने कपड़े खोल दूँगी।

मेरा तो मूवी से मन ही उखड़ गया, मैंने निखिल भैया की बाजू और ज़ोर से कस ली और थोड़ी सी करवट लेकर बैठी ताकि उनकी बाजू मेरे दोनों मम्मों के बीच में आ जाए, वो मेरे दोनों मम्मों को महसूस कर सकें।
शायद मेरी स्कीम कामयाब रही, पूरी मूवी में निखिल भैया ने भी अपनी कोहनी से मेरे दोनों मम्मों को खूब सहलाया।

मूवी देख कर बाहर निकले तो बाहर मौसम बड़ा सुहावना था। आसमान में बादल थे, ठंडी ठंडी हवा मगर बरसात नहीं थी।
निखिल भैया बोले- अरे वाह, आज तो बड़ा मस्त मौसम है। आज तो कुछ हो जाए।

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