बेहेन जब चुदाई के लिए तइयार होती है

ही फ्रेंड्स ! मेरा नाम मनोज है. मैं माहरॉशट्रे के पूना शहेर मे रहेता हू. मैं 26 साल का हू. ये कहानी ऐसी है जो काफ़ी लोगो का अनुभव होगा. मे हमेशा बातें शॉर्ट मे बताता हू. लेकिन ये कहानी बतने मे मुझे वक़्त लग सकता है. ये कहानी मेरी और मेरी बेहेन रिया की है. मेरी मोह बोलि सिस्टर मुझ से ३ साल छोटी है. अभी वो थर्ड एअर ब.कॉम मे पढ़ रही है. हम दोनो बचपन से ही एक दूसरे से बहुत झगड़ते थे. और हमेशा हमारी चीज़े बतने पर हमे गुस्सा आ जाता था. हम एक दूसरे से सिर्फ़ काम की बातें ही करते थे. इस तरह हमारा बचपन काफ़ी दूरियो मे गुज़रा. मैं फिर बड़ा होके अपनी हाइयर एजुकेशन और थोड़ा बहुत कमाने मे जुट गया. जिस से मेरा खुद का करैच निकल जाता था. और मैने रिया की पढ़ाई मे कभी उसे हेल्प नही की क्यो की वो मेरी बात ही नही सुनती थी. इस तरह हमारे बीच काफ़ी फ़ासले थे.

रिया जैसे जैसे बड़ी होती गयी वैसे उस के फिगर मे काफ़ी बदलाव आते गये. उस का रंग तो खुला हुआ था ही मगर उसके बूब्स और गांड बहुत उभर गये थे. जिस की वजह से ना चाहते हुए भी कभी कभी नज़र वाहा चली ही जाती थी फिर तुरंत ही रिश्ता मुझे नज़र हटाने को मजबूर कर देता था.

लाइफ मे ट्विस्ट तब आया जब मे बड़ा हुआ और धीरे धीरे मेरे अंदर सेक्स की समझ आने लगी. ये एक ऐसी फीलिंग है जो धीरे धीरे दिल मे घर बनती है और जिगयसा बढ़ती ही जाती है. मैं जब बचपन मे किसी लड़की को या औरात को कपड़े चेंज करते हुए देखता था तो अपने आप ही कुच्छ अजीब सा लगता था और देखते ही रहेने का मन कराता था. कभी कभी च्छुपके भी देखता था.

अब मे मेरा अनुभव बतने जर आहा हू. ये बात कुच्छ एक साल पहेले की है. घर मे सब लोग एक शादी के फंक्षन के लिए 4 दिन बाहर गये थे. मेरी वाइफ भी अपने ससुराल मे थी. मैं और रिया दोनो घर मे अकेले थे. रिया एक पार्ट टाइम जॉब कराती है. वो सुबह मे 9:30 बजे ऑफीस जाती थी. घर पे कोई था नही इसलिए रिया मुझे चाय और नाश्ता बना के देती थी. बाद मे वो अपना तिफ्फ़िं बना के ऑफीस जाती थी. उस दिन सुबह मे मैं सो रहा था. और रिया चाय नाश्ते की तैयारी कर रही थी.

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उसे कंप्यूटर मे भी कुच्छ काम था इसलिए वो काम पूरा कर के मेरे रूम मे आई. उसने देखा की मैं सो रहा हू तो अपने आप कंप्यूटर स्टार्ट किया. रात को मैने कंप्यूटर मे ब्लू मूवी देखी थी और फाइल क्लोज़ किए बिने ही सो गया था. उसने जैसे ही पीसी स्टार्ट किया तो वो ब्लू फिल्म अपने आप ऑटो ऋण हो गयी. मुझे नींद मे किसी के चिल्लाने की आवाज़ आई तो मे उठ गया और देखा तो रिया ब्लू मूवी क्लोज़ करने की कोशिश कर रही थी मगर वो हुआ नही तो वो भाग के कमरे से निकल गयी और बोला की भैया ये क्या है इसे बंद कर. मैं भी शर्मा गया और जल्दी से पीसी ही बंद कर दिया.

इस घतना के बाद हमने बात नही की और रिया काम पे निकल गयी. शाम को मे काफ़ी टेन्षन मे था की रिया आएगी तो मे क्या बात करूँगा. मैं उसके सामने कैसे ज़ाऊगा. अगर उसने मम्मी या पापा को बोल दिया तो क्या होगा. और अगर अपनी भाभी को बताया तो वो कुच्छ और ही सोचेगी. लेकिन फिर मैने सोचा के आज मैं उसे बता दूँगा की मेरे पास पीसी मे ऐसी काफ़ी चीज़े है क्यू की मे बड़ा हू और उसे मुझे पुच्छे बिने पीसी ऑन नही करना चाहिए.

शाम को जब रिया घर आई तो मैने उसे कहा की जल्दी से खाना बना और हम खाना खा के साथ मे बैठेंगे. रिया ने खाना बनाया और फिर फ्री हो कर हम दोनो मेरे रूम मे बैठे. मैने रिया को कहा की” रिया तुझे मेरा पीसी पुच्छे बिना चालू नही करना चाहिए था. अगर तुझे कोई काम हो तो मुझे बोलती. मैं तेरी हेल्प कराता.”

रिया ने कहा की ” तू कभी भी मुझ से ठीक से बात नही कराता तो मुझे लगा की मैं अपने आप ही काम करलू. मुझे एक एक्स्सेल फाइल चेक करनी थी मेरी पेन ड्राइव से लेकिन पीसी ऑन करते ही कुच्छ और ही चल रहा था” और ये बोलते ही वो धीरे से स्माइल करने लगी. मैं थोड़ा रिलॅक्स हो गया और कहा के इसके बड़े मे पेरेंट्स या भाभी को मत बठाना. उसने कहा की ये कोई बतने वाली बात नही है. अब मैं पूरी तरह रिलॅक्स हो गया.

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लेकिन सारा गेम अब शुरू हुआ. मेरे मन मे जिगयसा हुई के रिया ने मुझे कुच्छ नही कहा या गुस्सा भी नही किया इसका क्या मीनिंग है. मुझे ये भी लगा की रिया ने इस बात को लाइट्ली लिया कही शायद ये भी ब्लू मूवीस तो नही देखती ना. इस बात को लेकर मेरा दिमाग़ खराब हो गया था. मैने रिया को फिर से अपने रूम मे बुलाया और पुचछा की ” रिया मैं जनता हू की अब तू भी बड़ी हो गयी है. शायद तुझे भी ऐसी चीज़े देखने का मन कराता होगा ना?” रिया ने कहा ” नही भैया ऐसा तो कुच्छ भी नही. अब मे आगे कॉन्वर्सेशन नीचे लिख रहा हू.

मई : रिया तुझे कभी भी मन करे तो बाहर कही मत जाना. तू बड़ी हो गयी है और ऐसी बाते शेयर करने मे हमे शरमाना नही चाहिए. तू कही बाहर कोई ग़लत कदम उठाए इस से अच्छा तू घर मे ही देख ले. जब भी मन करे तू देख लिया कर बस इतना ध्यान रखना की घर मे कोई ना हो. और देख ने के बाद फाइल फोल्डर क्लोज़ कर देना.

रिया : भैया मुझे ऐसा देखना पसंद नही. तुझे पसंद है तो तू ही देखा कर. मैं किसी को नही बताउँगी.

मेरी हिम्मत बढ़ती ही जा रही थी क्यू की मुझे कोई नेगेटिव साइन नही मिल रहा था.

मई : ठीक है चल सो जाते है. लेकिन आज सच मे बहुत अच्छा लग रहा है की अब से हमारे बीच फ्रेंडशिप हो गयी है और हम एक दूसरे से बाते भी शेयर कर रहे है.

रिया : हा भैया मुझे भी काफ़ी रिलॅक्स फील हो रहा है. अब तक मैं भी तुझ से बात करने से डराती थी. मगर अब मैं भी तुझ से अपनी बाते शेयर कर सकती हू. और अब तो तू मुझ से चीटिंग भी नही कर सकता क्यू की मुझे तेरा सीकरेट पता है.

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