बस एक रात की कहानी

आज अपने पाले में पड़ी बिहारी औरत की चुत चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ | दोस्तों वो दिखने में तो लाजवाब थी ही साथ की उसका गोरा बदन उसकी साडी से मुझे अपनी ओर ललचाता हुआ पुकारा करता था | मैंने उसके बदन की चाहत में डूबने के लुइए कुछ भी करने के को तैयार था मैं किसी भी हद्द तक अब गुजरने को तैयार था | उसके चुचों इतने मोटे थे जैसे बस अब बहार ही निकल आ जाएँगे | वो औरत मेरे “हमारे सीमा चौक” नाम के ही नगर की निवासी थी | वो काम भी किया करता था और जहाँ तक मैं जानता हूँ उसके घर में उसके अलावा कोई भी नहीं रहा करता था | मैंने उसे हमेशा जब भी भी दीखता तो अपनी नज़र को उसक इगोर बदन पर टिकाये रखता था | वो जब भी मुझे इसी तरह देखती थी उसके लबों पर हलकी सी मुस्कान आ जाया करती थी |

एक दिन हम बस में एक साथ ही सफर कर रहे थे और जब अपने बस स्टॉप पर उतरने को हुए तो काफी भीड़ थी जिसपर मैंने भी हल्का सा धक्का मरते हुए उसके चुचों पर छू दिया जिससे उसकी तन में एक अचानक ही चकाचौंद आ उठी | वो एक दम से झिलमिला उठी और उसके चुचों बिलकुल सख्त होने लगे थे | दोस्तों उसके बाद तो मैंने भी उसके बंद को अपनी उंगलियों के छुआव से मनो मोहित कर ही लिया था | अब उसने ही एक दिन मुझसे खुद आकार बता करी और पना परिचय मुझे देने लगी | उस औरत के साथ थोड़ी – घनी बात हुई थी की उसने मुझे चाय के लिए अपने घर में बुला लिया | मैंने भी मुस्कान देते हुए उसके साथ चल पड़ा |

वो तभी अपने कपड़ों को बदलकर ई तो बस मेरा मुंह – मुंह खुला का खुला ही रह गया | मेरे दिमाक में वो गाना बज रहा था . .”कोई मेरे साथ एक रात गुज़ार . . मैं सुबह तक मैं करूँ तुझे प्यार . .” | वो कहने लगी,

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बस इतना ही था मेरे अंदर के शहर को जागने के लिए की मैंने उसके मोटे – मोटे चुचों को अपने हाथों में भरते उए चुसने लगा जिसपर वो भी गर्माते हुए गरम सांसें लेने लगी | उस औरत ने कुछ ही देर में अपनी आँखें भी बंद कर ली और नीचे से अपने हाथ से मेरे लंड को महसूस करने लगी | मैं उसकी चाह को पूरा करता हुआ उसकी हाथ को तडपते हुए मेरी पैंट पर झूम रहे थे | कुछ ही देर में अपनी पैंट को खोल नंगा हो चला | वो अब मेरे लंड को निकाल भूकी शेरनी तरह चूस रही थी | अब मैंने उसकी काली पैंटी को उतार दिया और उसकी चुत को उप्पर अपनी जीभ से चाटते हुए उँगलियाँ डालने लगा और उसे वहीँ लिटाकर उसके नंगी गोरी जाँघों को सहलाने लगा |

मैंने अपने लंड को उसकी चुत पर टिकाते हुए अब जोर का धक्का लगाया जिससे मेरा लंड अब फिसलता हुआ उसकी चुत में पूरा चला गया | अब मैंने भी धक्का लगाना तेज कर दिया था जिससे वो वहीँ लेटी हुए मेरे लंड के ज़ोरदार झटकों को ले रही थी | हम अब उसके बक्से पर लेटकर चुदम – चुदाई कर रहे थे और उसकी बढ़ती सिस्कारियों से उसका पूरा गूंज उठा था | वो भी मज़े में मेरे लंड के उसकी गांड को चीरने पर मज़े लुट रही थी | मैं ज्यादा देर उसकी चुत के मैदान पर अपने होस्श को जमा नहीं पाया और अपना पानी छोड़ दिया | अब मैंने उसकी रसीली गांड के बीच अपनी जीभ लहराते हुए उसकी चुत के निकले कामरस को भी अपनी जीभ में गटक लिया था

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