शादीशुदा समीना का अनोखा रिश्ता Part 1

जमाल खान एक बहोत बड़ा और कामयाब बिज़नेस मैन था। उसकी उम्र चालीस साल थी। उसकी बीवी समीना उससे करीब बारह साल छोटी थी। अठाइस साल की समीना बेहद जवान और खूबसूरत थी। मक्खन की तरह नरम, दूध की तरह सफ़ेद गोरी चिट्टी और गुलबदन और नाज़नीन हुस्न की मालिक थी। वो अपनी जवानी और हुस्न का खूब खयाल रखती थी। अपने जिस्म पर एक भी ग़ैर ज़रूरी बाल नही रहने देती। रोज़ाना इंपोर्टेड बेबी लोशन के साथ अपने जिस्म का मसाज करती। बक़ायदगी के साथ ब्यूटी पर्लर जाती और अपने हुस्न को चार चाँद लगवाती। हर वक्त अच्छे मॉडर्न कपड़े और काफी ऊँची-ऊँची ऐड़ी वाले सैंडल पहने रहती थी। उसका कद पाँच फुट तीन इंच था… समीना को इस बात का काम्प्लेक्स था और इसी वजह से वो हर वक़्त हाई हील के सैंडल पहनना पसंद करती थी। वो जानती थी कि अगर वो अपनी जवानी और खूबसूरती का खयाल नहीं रखेगी तो जमाल खान जैसा मालदार आदमी उसे छोड़ कर किसी और के पास भी जा सकता है। अपनी अदाओं के जलवे जमाल खान को दिखाती रहती और वो भी एक भरपूर और वाजीह मर्द था और हर तरह से समीना का खयाल रखता और उसकी माली और जिस्मानी ज़रूरतों को निहायत ही अच्छे अंदाज़ में पूरा करता… समीना की मुकम्मल तसल्ली तक। पार्टियों में हमेशा ही उनकी जोड़ी की तारीफ़ होती थी। दोनों ही एक दूसरे का बहोत खयाल रखते थे और एक दूसरे से बहोत मोहब्बत करते थे।

जमाल खान अपने बिज़नेस में काफी मसरूफ रहता था और समीना ज्यादातर घर पे ही रहती थी। घर…. घर क्या था एक बहोत बड़ा बंगला था। नौकर चाकर, कारें, ड्राइवर, सब कुछ था। घर पे काम काज कोई करने को था नहीं। नौकर ही सारा काम करते थे। खाना पकाने के लिये भी खानसामा था जो खाना बनाने के बाद अपने क्वार्टर में चला जाता था जहाँ वो अपनी बीवी के साथ रहता था। इस तरह वो घर के अंदर ज्यादातर अकेली ही होती थी। समीना का जहाँ दिल करता वो ड्राइवर के साथ जा सकती थी और जाती भी थी। खूब शॉपिंग वगैरह करती थी… रुपये- पैसों की तो कोई कमी थी नहीं। समीना जमाल खान के साथ बाहर के मुल्कों के बिज़नेस टूर पे भी जाती और तमाम किस्म की बिज़नेस और सोशल पार्टियों में भी शामिल रहती और शराब वगैरह भी पीती थी। हमारे मुल्क में शराबनोशी पर पाबंदी जरूर है लेकिन अमीर – गरीब हर तबके के लोग खुल्लेआम शराब पीते हैं। फर्क सिर्फ़ इतना है कि गरीब लोग देसी शराब से काम चलाते हैं जबकि अमीरों को हर किस्म की कीमती शराब मुयस्सर होती है। आजकल तो मॉडर्न लड़कियाँ और औरतें भी सर-ए-आम शराब नोशी का मज़ा लेती हैं और समीना भी लिहाज़ा इसी तरह की खातूनों में शामिल थी और पार्टियों और घर पे भी बाक़ायदा शराब पीने की शौकीन थी।

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एक बार जब जमाल खान और समीना अमेरिका के टूर पर गये तो वहाँ इनका मेज़बान रेहान शरीफ़ था। उसने उनको होटल में ठहराने की बजाय अपने घर में ठहराया। रेहान शरीफ़ और उसकी खूबसूरत बीवी ज़हरा बहोत ही अच्छे और मिलनसार लोग थे। उन्होंने उनकी खूब खातिरदारी की। उनके घर में दो कुत्ते भी थे जोकि उनके घर में ही पल के जवान हुए थे। सफ़ेद रंग के जिस्म पर काले रंग के बहोत खूबसूरत धब्बे-धब्बे बने हुए थे। करीब चार फुट लंबा और ढाई फुट ऊँचा कद था। भारी मगर बहोत मज़बूत और बेहद चुस्त और फुर्तीला जिस्म था इनका। दिलचस्प बात ये थी कि दोनों कुत्ते बिल्कुल एक जैसे थे। यानी वो दो जुड़वाँ कुत्ते थे – जिम्मी और टॉमी। समीना को भी वो कुत्ते बहोत अच्छे लगे थे। दोनों ही बहोत अच्छे सधे हुए थे। अपने मालिकों से बहोत प्यार करते थे। समीना ने देखा कि दोनों कुत्ते रेहान और ज़हरा के आगे पीछे फिरते रहते अपनी दुम्म हिलाते हुए उनके हुक्म का इंतज़ार करते हुए। दोनों कुत्ते घर के अंदर फिरते थे मगर समीना को कहीं भी कोई उनकी फैलायी हुई गंदगी नज़र नहीं आयी। रेहान शरीफ़ ने जब अपने मेहमानों की पसंदीदगी और दिलचस्पी अपने कुत्तों में देखी तो उसे और भी अच्छा लगा और उसने उनको अपना एक कुत्ता तोहफ़े में देने की ऑफर कर दी। जमाल खान और समीना इस ऑफर पे बहोत हैरान और खुश हुए और समीना ने जमाल खान से वो कुत्ता अपने साथ ले जाने की फ़रमाइश की। कुत्ता तो जमाल को भी पसंद आया था इसलिये उन्होंने रेहान शरीफ़ की ऑफर को शुक्रिया के साथ कबूल कर लिया। समीना को खुश होते हुए देख कर रेहान शरीफ़ ने माइनी खेज़ नज़रों से अपनी बीवी ज़हरा की तरफ़ देखा और दोनों मुस्कुरा दिये।

समीना बोली, “ज़हरा… आप लोगों का बहोत-बहोत शुक्रिया! ये तो सारा-सारा दिन घर से बाहर रहते हैं और मैं घर में बोर होती रहती हूँ… अब आपने एक डॉगी हमें दिया है तो चलो उसके साथ मेरी कुछ मसरुफ़ियत बनी रहेगी और वक़्त भी पास हो जायेगा!”

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ज़हरा मुस्कुरा के बोली, “येस… टॉमी के साथ आप का वक़्त सच में बहोत अच्छा गुज़रेगा और आप हमेशा हमें याद करोगी। टॉमी मेरा पसंदीदा कुत्ता है। उसकी बहोत अच्छी तरबियत की हुई है हमने। आप लोगों को कभी भी इससे किसी किस्म की कोई शिकायत नहीं होगी!”

समीना खुश और पुरजोश होती हुई बोली, “मुझे बहोत अच्छा लगेगा जब ये मेरे इशारों पे चलेगा।”

रेहान शरीफ़ हंसते हुए बोला, “ये इशारों पे चलता भी है और अपने इशारों पे चलाता भी है!”

उसकी बात पे ज़हरा हंसने लगी और समीना भी बिना कुछ समझे उनके साथ हंसने लगी। जब अमेरिका से दोनों वापस आये तो टॉमी भी उनके साथ था और दोनों बहोत खुश थे।

टॉमी ने जमाल खान के घर में रहना शुरू कर दिया। वो सच में ही बहोत शानदार जानवर था… बहोत ही मोहज़्ज़ब और तरबियत-याफ़्ता… बिल्कुल अमेरिकी आवाम की तरह। शुरू- शुरू में वो नये माहौल में आके घबराया हुआ था। थोड़ा तंग किया। वो भी डरा हुआ था और जमाल खान और समीना भी उससे थोड़ा दूर-दूर रहते। मगर आहिस्ता-आहिस्ता उनका खौफ़ जाता रहा और वो उसके करीब आने लगे और वो भी बहोत जल्द जमाल खान और समीना के साथ मानूस हो गया। घर के अंदर ही रहता और समीना के आगे-पीछे फिरता रहता। समीना खुद उसे अपने हाथों से खिलाती… उसे सैर करवाती। शुरू में तो उसके गले में पट्टा डाला गया था मगर आहिस्ता-आहिस्ता वो समीना ने उतार फेंका और अब टॉमी घर के अंदर बिना रोकटोक और बिना किसी रुकावट के फिरता था। उसकी देख भाल के लिये एक खास नौकर रखा था मगर टॉमी तो ज्यादा वक़्त समीना के साथ ही गुज़ारता और समीना के साथ ही खुश रहता। समीना को भी अपना फ़ारिग़ वक़्त गुज़ारने का एक शुगल मिल गया था। टॉमी समीना के साथ खेलता… उसके सैंडलों और पैरों को चाटता… अपना मुँह और सिर उसके सैंडलों और पैरों से रगड़ता और समीना भी उसके सिर पे और जिस्म पे हाथ फ़ेर के उसके जिस्म को सहलाती और उसकी मोहब्बत का जवाब मोहब्बत से देती।

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