सिस्टर को चुदाई करवाते हुए देखा

हिी फ्रेंड्स, मेरा नाम छोटू है. मेरी आगे 28 साल है और मई देसी कहानी साइट का रेग्युलर रीडर हू. आज मई भी अपनी एक स्टोरी शेर करना चाहता हू. ये कहानी मेरी बड़ी बेहन की है.

तो चलिए सुनता हू कहानी…

ये कहानी 2005 की है जब मई 10त क्लास म पढ़ता था. तो उस वक़्त मेरी सिस्टर कॉलेज फर्स्ट एअर ब.टेक की स्टूडेंट थी और मीरूत मे पढ़ती थी.

6 महीने तक तो उसने कॉलेज घर से ही उपदोवन् किया. फिर उसके बाद उसने मीरूत मे ही कमरा लेकेर पढ़ाई करने की ज़िद्द करी तो घरवाले मान गये.

अगर मई अपनी सिस्टर की बात करू तो जब उसने कॉलेज मई अददमीससिओं लिया था तब तो वो पतली सी थी. लेकिन कॉलेज के एक साल के अंदर ही उसका सरीर भरने लगा था. अब उसका फिगर काफ़ी कामुक हो गया था.

ह्यूम लगा पानी चेंज होने के कारण और फिर आगे भी बढ़ रही थी तो ये होना नॉर्मल था.

सनडे की कॉलेज की छुट्टी रहती थी शुरू शुरू म तो दीदी हेर सनडे घर आया करती थी. लेकिन 3-4 महीने बाद वो महीने मई सिर्फ़ एक या 2 बार आने लगी थी.

एक सनडे जब दीदी घर आई हुई थी. डोपेहेर के टाइम वो मम्मी के साथ बाज़ार चली गई. तो मई उनका बेग देखने लगा, तो उसमे मुझे मेकप का समान और कितबे दिखाई दी. डर्सल मई बेग मई पैसे ढूँढ रहा था.

फिर जब मुझे कुछ ना दिखाई दिया तो मैने पूरा बेग पलट दिया. मैने देखा किताबो के नीचे एक लाल कलर का कपड़ा था कुछ जालीदार सा मैने उसको खोलके देखा तो वो एक रेड कलर की निघट्य थी.

मई सोचने लगा इस तेरहा के कपड़े तो मैने ब्लू फिल्म्स मई लड़कियो को पहेनटे देखा था, इसे दीदी क्यो पहेनटी है.

फिर मैने बेग को और अच्छे से चेक किया तो उसमे से एक कोहिनूर का कॉंडम निकला. उसे देखकर मेरा दिमाग़ और खराब हो गया. अब मई साँझ गया था की दीदी इस निघट्य को पहेंकर किसी से चुदाई करवाती होंगी. ये सोचकर मेरा दिमाग़ पूरी तेरहा से हिला हुआ था.

खैर मैने किसी को कुछ नही कहा और जैसे बेग था वैसा करके रख दिया. अब मुझे अपने दोस्त की कही बात याद आने लगी की लड़कियो का चुदाई के बाद सरीर मस्त होने लगता है. मुझे लगता है दीदी की कोई ढंग से पिलाई कर रहा है तभी उनके बूब्स मोटे और गांद एकद्ूम गूल होती जा रही है.

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वो टाइम भी आया जब दीदी की सारी पूल खुल गयी की वो मीरूत मई किसी लड़के के साथ प्ग मे रहती थी जिसने उनकी खूब पिलाई की.

तो पापा ने उनका कॉलेज बंद करा दिया और घर पे बिता दिया.

फिर धीरे धीरे टाइम निकलता गया और दीदी की आयेज और चुदाई की आग बढ़ती चली गयी. लेकिन उन्हे डूबरा वो सब करे का मोका नही मिला.

करीब 3 साल बाद एक दिन घर पे बुआ जी के लड़के का फोन आया की वो घर आएगा शाम को और वही रुकेगा. तो पापा बोले कुछ नस्टे का समान ले आना.

शाम को कारेब 6 बजे रवींद्रा भैया (बुआ जी के लड़के) आए तो उनके साथ एक कोई 28 साल का लड़का और आया था. भैया ने उसका परिचय कारया की वो उनका दोस्त है और उनके साथ कंपनी मे काम करता है. उसका नाम राहुल था लेकिन वो मुस्लिम था.

खैर कोई बात नही हुँने उनकी दावत पानी की खाना वाना खिलवाया. इन सब मे रात के 10 बाज गये, पापा बोले 2 चारपाई छत पे डाल लो रात मे लाइट चली जाती थी. तो हुँने 2 चारपाई भैया और उनके दोस्त के लिए उपेर डाल दी.

अब मई, रवींद्रा भैया और उनका दोस्त बाकचोड़ी करने लगे. तभी थोड़ी देर बार नेहा दीदी भी उपेर आ जाती है.

भैया बोलते है नेहा तू क्यू चुपचाप है तेरी शादी टाई कर दिया इन्होने? दीदी बोली नही भैया. बस ऐसे फिर ऐसे बात होती रही. तो मैने नोटीस किया की राहुल बार बार दीदी से ज़्यादा बात कर रहा था और दीदी भी उससे खुलके बात कर रही थी. रवींद्रा भैया सो गये थे और मुझे भी नींद आ रही थी.

मई भी सोने लगा, करीब 1 घंटे बाद मेरी आँख खुली तो देखा राहुल और नेहा दीदी अभी भी बात कर रहे थे हास हास कर. कुछ देर बाद लाइट आ जाती है और मई और दीदी नीचे चले जाते है और सो जाते है. सुबा 9 भजे मेरी आँख खुली तो भैया और राहुल जेया चुके थे.

लेकिन आज दीदी बड़ी खुश दिखाई पद रही थी.

एक महीने बाद हुमारा लंडलिने का बिल आता है तो पापा चिल्लाने लगते है की इतना बिल कैसे आया. मुझे भी साँझ नही आ रहा था की इतना बिल कैसे आ सकता है.

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तो मई टेलिफोन एक्सचेंज गया और उनसे बात की तो उन्होने मुझे पुर महीने की डीटेल्स की कॉपी दे दी. मैने देखा की एक नंबर पे रोज 1 घंटे बात होती है. तो मैने उस नंबर को चेक करा तो पाया की वो नंबर राहुल का है.

मेरी साँझ मे सब आने लगा था की दीदी राहुल से बात करती है.

एक दिन डोपेर म जब घर पर कोई नही था तो मैने सोने का नाटक किया और दीदी की फोन पे बात सुनी.

वो कह रही थी – नही राहुल अभी नही जब कोई नही होगा घर पे तब आ जाना, फिर जो करना है कर लेना. मई तुम्हे बता दूँगी जब घरवाले कही बहेर जाएँगे.

अब मई साँझ गया की बात बहुत आयेज बढ़ चुकी है.

फिर दो महीने बाद वो समय भी आया जब घरवाले गाओ मे एक शादी मे गये. उन्होने दीदी से पूछा चलने के लिए तो दीदी ने माना कर दिया. मई साँझ गया था वो क्यो माना कर रही है.

तो घरवाले मुझे उनके पास छोड़ गये.

शाम को पापा का फोन आया की रवींद्रा भैया के साथ जो लड़का आया था वो आएगा उसका ढयन रखना, खाना वाना आचे से खिलवा देना.

मई साँझ गया की ये सब दीदी की प्लानिंग है.

शाम को राहुल आता है दीदी आज बड़ी खुस थी. दीदी ने मुझे पैसे देकर कहा की जेया बाज़ार से समोसे लाकर देदे.

मई चला गया, जब मई वापस आया तो घर का दरवाजा बंद था. मैने डोर बेल बजाई तो काफ़ी देर बाद दीदी ने दरवाजा खोला. मैने देखा उनके बाल खुले हुए थे. मई साँझ गया की इनके बीच ज़रूर चुम्मा छाती हुई होगी.

मई सामान देकर आंदार गया तो राहुल बेड पर लेता हुआ था. बोलने लगा क्या हाल है छोटू.. मैने कहा ठीक, और बेड के साइड मे बेत गया. तो मेरी नज़र बेड के साइड मे पड़े एक लाल कपड़े पर गयी. मई उसे उठा कर बहेर आ गया और फिर बातरूम म जाकर देखा तो दीदी की पनटी थी और वो गीली थी कुछ चिपचिपा सा था. दीदी और राहुल के बीच इस डॉरॅन काफ़ी कुछ हुआ होगा जो पनटी भी निकल गयी.

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