मेरी बीवी छुड़वाने गयी है

वह बोली- “वह भोसड़ी का अपनी बड़ी बहन को चोद रहा होगा? उसके बाद उसके चाचा की बहू चुदवाने आएगी उससे। मैं भी तुमसे चुदवाने के बाद मनीष अग्रवाल जी से चुदवाकर घर वापस जाऊँगी…”

मयंक बड़ी हैरत भरी निगाहों से हम दोनों को देखने लगा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है?

मैंने कहा- यार, तुम चिंता न करो, मैं तुम्हें सब समझा दूँगा पहले तुम इस सुषमा की जैन बुर चोदो, तुमने पहले कभी जैन बुर चोदी है? जैन बुरें ज्यादा ही गोरी, चिकनी और चुदक्कड़ होती हैं।

मयंक सुषमा भाभी को चोदने में जुट गया।

भाभी बोली- यार मयंक, अब तुम पीछे से मेरी गाण्ड में पेलो लण्ड, मैं आगे से मनोज का लण्ड चूसते हुए गाण्ड मरवाऊँगी।

मैं पहली बार भाभी को गाण्ड मराते हुए देख रहा था। थोड़ी देर में भाभी ने मयंक को नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर उसकी तरफ मुँह करके लेट गई, लण्ड उसकी चूत में घुस गया।

फिर वह अपनी गाण्ड उठाकर बोली- “मनोज, अब तुम मारो मेरी गाण्ड…”

थोड़ी देर गाण्ड मरवाने के बाद वह बोली- यार मनोज, तुमने इस तरह का प्रोग्राम बनाकर कई बीवियों के मन की इच्छा पूरी कर दी। वरना बिचारी एक ही लण्ड पे पूरी ज़िन्दगी निकाल देती हैं और तरह-तरह के लण्ड के लिए हमेशा तरसा करती हैं।

तब तक मैंने कहा- भाभी, अब मैं खलास होने वाला हूँ।

वह बोली- “यार, मेरे मुँह में झड़ना, मैं तेरा लण्ड पियूंगी…” वह वास्तव में मेरा झड़ता हुआ लण्ड पीने लगी और उसके बाद उसने मयंक का भी झड़ता हुआ लण्ड पिया।

सुषमा भाभी चुदवाकर चली गई और उसके बाद मयंक भी चला गया।

शाम को करीब 7:00 बजे मेरी बीवी चुदवाकर कर वापस आ गई। उसका चेहरा चमक रहा था और इधर मेरा भी चेहरा चमक रहा था।

वह भी तैयार हो गई और मैं भी।

हम दोनों लोग बैठे बातें कर रहे थे, इतने में मयंक अपनी बीवी गौरी के साथ आ गया। मैं उसकी बीवी से पहले कई बार मिल चुका था, मीनाक्षी की भी दोस्ती है उससे।

हम चारों लोग दारू पीने बैठ गये।

मयंक बोला- यार, तुमने वह बात नहीं बताई अभी तक?

मैंने कहा- यार देखो, मेरी शादी के दो साल बाद मेरी बीवी एक दिन बोली- “क्या तुमको दो साल से एक ही बुर बार-बार चोदने में मज़ा आता है? मुझे तो एक ही लण्ड से बार-बार चुदवाना अच्छा नहीं लगता?

मैंने कहा- लेकिन फिर किया क्या जाये?

उसने कहा- तुम मेरी सहेली की बुर चोदोगे? बोलो, मैं उसे मना लेती हूँ।

मैंने कहा- हाँ क्यों नहीं चोदूँगा?

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बस उसने कविता से बात की तो वह फौरन तैयार हो गई। उसी रात कविता हमारे बेड पर आ गई और रात में जब मैं बिस्तर पर गया तो मेरी बीवी ने मेरा लण्ड उसे पकड़ा दिया। उस दिन मैंने पहली बार किसी और की बीवी को अपनी बीवी के सामने चोदा।

फिर कविता ने मुझसे कहा- यार मनोज… क्या तेरी बीवी मेरे हसबैंड से चुदवा ले?

मैंने हाँ कर दी। उसके बाद कविता का घर मैंने उसे फिर चोदा और उसके मियां ने मेरी बीवी चोदी।

कविता बोली- यार मनोज, हम लोग क्यों न एक ऐसा प्रोग्राम बनाएँ जिसमें हम एक दूसरे की बीवियां चोदते रहें और बीवियां पराये मर्दों से चुदवाती रहें? कविता फिर बोली- और फिर मैंने सोचा एक नया तरीका? एक इतवार को मैं सबकी बीवियां दूसरों के घर चुदवाने के लिए भेजूंगी। यानि मर्द सब अपने-अपने घर में रहेंगे और बीवियां जा जाकर चुदवायेंगी? जैसे आज मनोज की बीवी आज चुदवाकर कर आई है। दूसरे इतवार को बीवियां घर पर रहेंगी और मैं मर्दों को भेजूंगी जहाँ वे जाकर पराई बीवियां चोदेंगे? कौन किसको चोदेगा और कौन किससे चुदवायेगी यह मैं तय करूंगी। इस तरह हर बीवी दो मर्दों से चुदायेगी और हर मर्द दो बीवियां चोदेगा।

मैंने कहा- बस इसी तरह लोग जुड़ते गये और हम लोग चुदाई का मज़ा उठाते गये।

मयंक बोला- यार, आज तुम मेरी बीवी चोदो।

मैंने उसकी बीवी गौरी की तरफ देखा।

वह मुश्कुरा रही थी।

मैंने कहा- यार अपनी बीवी गौरी भाभी से तो पूछ लो?

गौरी भाभी बोली- “अच्छा, आज जब तुमने मेरे मियां से सुषमा की बुर चुदवाई तो तुमने मुझसे पूछा था, भोसड़ी के मनोज? मैं कोई ऐतराज़ नहीं जता रही हूँ। मैं खुद कह रही हूँ कि तुम मुझे चोदो। सीधी सी बात है जब मेरा मियां किसी को चोदेगा तो मैं भी किसी से चुदवाऊँगी। अब खोलो न लौड़ा अपना…” ऐसा कहकर गौरी ने मेरे लण्ड पर हाथ मारा।

उधर मेरी बीवी ने मयंक के लण्ड पे हाथ मारा और कहा- दिखाओ न इस लौड़े को जिसने सुषमा की बुर चोदी है?

मैंने गौरी की चूची दबाकर कहा- भाभी, पहले अपना जलवा तो दिखाओ मुझे? मैं पहले तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ। मुझे बीवियां बगैर कपड़ों के ज्यादा अच्छी लगती हैं।

वह बोली- “मुझे भी मर्द बिना कपड़ों के ज्यादा अच्छे लगते हैं…” उसकी जब ब्रा खुली तो दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।

वह बोली- “मुझे भी मर्द बिना कपड़ों के ज्यादा अच्छे लगते हैं…” उसकी जब ब्रा खुली तो दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।

मेरे मुँह से निकला- वाह भाभी वाह… कितनी मस्त चूचियां है आपकी? इन्हें देखकर तो लौड़ा बहनचोद अपने आप खड़ा हो जाये।

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फिर जब उसने अपना पेटीकोट खोला तो गजब हो गया। उसकी गद्देदार मस्त चिकनी चूत देखकर तो मैं पागल हो गया। मैंने जब अपनी नज़र घुमाई तो देखा कि मयंक मेरी बीवी की चूत चाटने में जुटा है।

आखिरकार गौरी ने मेरा खड़ा लौड़ा पकड़ लिया, वह बोली- “बाप रे बाप… इतना बड़ा लौड़ा लेकर घूमते हो तुम? इसे मेरी बुर में छोड़कर जाया करो?” गौरी भाभी मेरा लण्ड पीने लगी।

और मेरी बीवी मयंक का लण्ड पीने लगी।

दूसरों की बीवियों से लण्ड चुसवाने का मेरा चस्का बढ़ता गया। जब किसी की बीवी मेरा लौड़ा चूसती है तो मुझे अपार आनन्द आता है।

मैंने यह बात जब गौरी भाभी से कहा तो वह बोली- “और मैं भी जब किसी पराये मर्द का लौड़ा चूसती हूँ तो मुझे अपार आनन्द आता है। अब आज से मैं भी तुम्हारे ग्रुप में शामिल हो गई हूँ, अपनी बुर चोदी कविता से बता दो प्लीज? वह भी हर हफ्ते मुझे भी लण्ड भेजा करे? और मेरे पति के पास बुर भिजवाया करे…” ऐसा कहकर गौरी भाभी मेरा लण्ड अपनी बुर में घुसाकर चुदवाने लगी।

उधर मेरी बीवी भी मयंक से चुदवाने में जुट गई, वह बोली- हाय मयंक, आज वैसे मैं दो-दो मर्दों से चुदवाकर आई हूँ लेकिन तेरा लौड़ा बड़ा अनोखा मज़ा दे रहा है मुझे। सुषमा भोसड़ी वाली ने बड़ा मज़ा किया होगा?

तब तक गौरी बोली- हाँ मीनाक्षी भाभी, तेरे मियां का लौड़ा तो लाखों में एक है। आज मुझे लग रहा है कि वाकई पराये मर्दों के लण्ड बड़े शानदार होते हैं। आज मुझे मिल रहा है जवानी का असली मज़ा, हाय मेरे राजा मनोज और चोदो मुझे… खूब कस-कस के चोदो मुझे। मैं तेरी रखैल हूँ, मैं तेरी दूसरी बीवी हूँ, मैं तेरी रंडी हूँ। मैं तेरी कुतिया हूँ, मैं छिनाल हूँ, मैं चुदक्कड़ हूँ यार मुझे चोदो। अपने दोस्तों के भी लण्ड पेलो मेरी बुर में, मेरे राजा मेरी गाण्ड मारो, मेरी चूची चोदो? तेरा मादरचोद लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है मुझे। इसकी माँ का भोसड़ा मैं इसे हर रोज़ पेलूँगी अपनी चूत में?

मैंने महसूस किया कि गौरी भाभी को वाकई बड़ा मज़ा आ रहा है, उसे बहुत दिनों के बाद कोई पराया आदमी चोदने वाला मिला है। मुझे सबसे ज्यादा मज़ा तब आया जब गौरी भाभी ने मेरा झड़ता हुआ लण्ड चाटा। उसी दिन से गौरी-मयंक मेरे ग्रुप में शामिल हो गए।

तो दोस्तों, इसी तरह हमारी मौज़ मस्ती हर इतवार को होती रहती है।

मैं भी खुश और मेरी बीवी भी खुश।

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