कच्ची उम्र की रिंकू से मस्त चुदाई

अगली रात डिनर के टाइम डिनर टेबल पर रिंकी डिनर सर्व कर रही थी, आमतौर पर डॉली डिनर सर्व करती थी लेकिन उस दिन रिंकी डिनर सर्व कर रही थी, आते-जाते बहाने बहाने से मुझे यहां वहां छू रही थी।
डिनर हुआ, आईस क्रीम मैंने खुद सबको सर्व की। बच्चों की और डॉली वाली प्लेट में मैंने वो पीसी हुईं नींद की गोलियां मिला दी। सब ने आईसक्रीम खाई और करीब 9:30 बजे मैं एक दोहरी मनस्थिति में अपने बैडरूम में आ गया।
नींद की गोलियों का असर डॉली पर एक से डेढ़ घंटे बाद होना था।
ब्रश करने के बाद मैंने हस्तमैथुन किया और अपना अंडरवियर पहने बिना ही पजामा पहन लिया और एक नावेल लेकर वापिस अपने बिस्तर पर आ जमा। मैं अपने बिस्तर पर दो तकियों के साथ पीठ टिका कर, पेट तक चादर ले कर ओढ़ कर और घुटने मोड़ कर नॉवल पढ़ने लगा।
सब काम निपटा कर, करीब सवा दस बजे रिंकी और डॉली दोनों बैडरूम में आईं। तब तक बैडरूम में चलते A.C की बड़ी सुखद सी ठंडक फ़ैल चुकी थी।
आते डॉली बोली- आज तो मैं बहुत थक सी गई हूँ, बहुत नींद आ रही है!
‘मुझे भी!’ रिंकी ने भी हामी भरी।
‘तो सो जाओ, किसने रोका है।’ मैंने कहा।
‘और आप?’ डॉली ने पूछा।
‘मैं थोड़ा पढ़ कर सोऊंगा, मुझे अभी नींद नहीं आ रही है।’ मैंने कहा।
‘ठीक है… पर आप ट्यूब लाइट बंद करके टेबललैम्प जला लें!’ डॉली ने मुझ से कहा।
मैंने सिरहाने फिक्स टेबल-लैम्प जला कर ट्यूब लाइट बंद कर दी।
अब स्थिति यूं थी कि मेरे सर के ऊपर थोड़ा बाएं तरफ टेबल-लैम्प जल रहा था और रिंकी मेरे दाईं तरफ क़दरतन अंधेरे में थी और मेरे दाईं ओर से, मतलब डॉली की ओर से रिंकी को साफ़ साफ़ देख पाना मुश्किल था क्योंकि बीच में मैं था और रिंकी मेरी परछाई में थी।
बीस-पच्चीस मिनट बिना किसी हरकत के बीते। वैसे तो मेरी नज़र नॉवेल के पन्नों पर थी लेकिन दिमाग रिंकी की ओर था।
कनखियों से रिंकी की ओर देखा तो पाया कि रिंकी बाईं करवट लेटी हुई मेरी ओर ही देख रही थी।
फिर रिंकी ने आँखों ही आँखों में मुझे लाइट बंद करने का इशारा किया लेकिन मैंने उसे अभी रुक जाने का इशारा किया। जबाब में रिंकी ने मुझे ठेंगा दिखा कर मुंह बिचकाया, ऊपर चादर ले कर उलटी तरफ करवट ली और मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई।
मुझे हंसी आ गई और मैंने हाथ बढ़ा कर रिंकी का कंधा छूआ तो उसने मेरा हाथ झटक दिया। मैंने दोबारा वही हाथ उस की कमर पर रखा तो रिंकी ने दुबारा मेरा हाथ अपनी कमर से झटक दिया।
लड़की सचमुच रूठ गई थी।
अब के मैंने अपना हाथ हौले से रिंकी के ऊपर वाले नितम्ब पर रख दिया, इस बार रिंकी ने मेरा हाथ नहीं झटका। मैं धीरे-धीरे कोमलता से रिंकी का पूरा नितम्ब सहलाने लगा।
अचानक मुझे महसूस हुआ कि आज रिंकी ने लोअर के नीचे पैंटी नहीं पहन रखी थी। वही हाथ रिंकी की पीठ पर फिराने से पता चला कि ब्रा भी नदारद थी। इन सब का सामूहिक मतलब तो ये था कि मेरी प्रेयसी अभिसार के लिए आज पूरी तरह से तैयार थी।
ऐसा सोचते ही मेरा लिंग अपनी पूरी भयंकरता के साथ मेरे पजामे में फुंफ़कारने लगा।
अपना वही हाथ रिंकी के कंधे तक ला कर मैंने रिंकी का कंधा हलके से अपनी ओर खींचा तो रिंकी सीधी हो कर लेट गई और आँख के इशारे से मुझे टेबल-लैम्प बुझाने को कहा।
मैंने पहले डॉली की ओर घूम कर देखा, अपना चेहरा परली तरफ घुमा कर हल्क़े से कंबल में चित लेटी डॉली गहरी निद्रा में थी। मैंने हाथ बढ़ा कर टेबल लैम्प बंद किया और अंधेरा होते ही झुक कर रिंकी के होंठों पर होंठ रख दिए।
रिंकी ने फ़ौरन अपनी बाजुएं मेरे गले में डाल दी और बड़ी शिद्दत से मेरे होंठ चूसने लगी।
थोड़ी देर बाद मैं सीधा हुआ और फ़ौरन दोबारा रिंकी की ओर झुक कर मैंने रिंकी के माथे पर, आँखों पर, गालों पर, नाक पर, गर्दन पर, गर्दन के नीचे, सैंकड़ों चुम्बन जड़ दिए।
रिंकी के दाएं कान की लौ चुभलाते समय मैं रिंकी के मुंह से, आनंद के मारे निकलने वाली ‘सी…सी… सीई… सीई… सीई… ई…ई…ई’ की सिसकारियाँ साफ़ साफ़ सुन रहा था।
मैंने रिंकी के नाईट सूट के ऊपर के दो बटन खोल दिए और अपना हाथ अंदर सरकाया। रुई के समान नरम और कोमल दो गोलों ने जिन के सिरों पर अलग अलग दो निप्पलों के ताज़ सजे थे, मेरे हाथ की उँगलियों का खड़े होकर स्वागत किया।

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