कच्ची उम्र की रिंकू से मस्त चुदाई

मैं अपने मुक्त हुए हाथ से डॉली की जाँघ जांचने लगा।
सारा दिन जैसे हवाओं के हिण्डोले पर बीता, जो मेरे और रिंकी के बीच चल रहा था, उस बारे में सारा दिन मेरे अपने ही अंदर तर्क कुतर्क चलते रहे।
एक बात तो पक्की थी कि रिंकी की तो ख़ैर कच्ची उम्र थी पर मैं जो कर रहा था वो सामाजिक और नैतिक दृष्टि से गलत था और मैं खुद जानता था कि मैं गलत कर रहा था।
लेकिन वो जैसा कहते हैं कि गुनाह की लज़्ज़त मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी।
साली की बेटी की कच्ची उम्र की लज़्ज़त मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी, मैंने सोच लिया था कि आज से मैं रिंकी वाली साइड सोऊंगा ही
नहीं लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहा था, मेरा पक्का इरादा डाँवाडोल हो रहा था।
शाम आई… मैं घर आया, आते ही रिंकी मेरे लिए पानी का गिलास ले कर आई, ग़िलास पकड़ते वक़्त मैंने रिंकी की आँखों में देखा,
रिंकी ने शर्मा कर नज़र नीची कर ली और खाली गिलास ले कर चली गई।
आज रात तो कुछ हो कर रहना था, ऐसी सोच आते ही पतलून के अंदर ही मेरा लिंग भयंकर रौद्र रूप में आ गया, रात की प्रतीक्षा में
समय काटना मुश्किल हो गया था।
शाम को बाथरूम में नहाते समय मैंने एक बार फिर ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ किया।

डिनर करते समय मैंने रह रह कर आती जाती डॉली के नितंबों पर चुटकी काटी। डिनर टेबल पर ही डॉली ने मुझ से रिंकी के कमरे के
A.C के बारे में पूछा कि कब ठीक हो के आएगा?
यूं मैंने कह तो दिया कि एक-आध दिन में आ जाएगा पर मेरा इरादा तो रिंकी के कमरे के A.C को कयामत के दिन तक ना लाने का
हो रहा था।राम राम कर के डिनर निपटाया।
वैसे हम फ़ैमिली के सब लोग डिनर के बाद लिविंग रूम बैठ कर कुछ देर गप्पें हांकते है लेकिन उस दिन मैं सीधा अपने बैडरूम में
चला गया।
बाथरूम में ब्रश करने के बाद मैंने अपना अंडरवियर उतार कर वाशिंग-बास्केट में डाल दिया और पजामा बिना अंडरवियर के पहन कर
सीधे अपने बिस्तर पर जा कर A.C का टेम्प्रेचर 20 डिग्री पर सेट कर दिया।
डॉली और रिंकी अभी बैडरूम में आईं नहीं थी, मैंने बिस्तर में लेट कर आँखें बंद कर ली, बीसेक मिनट बाद दोनों बैडरूम में आईं और
मुझे सोता पाया।
10-15 मिनट हल्की-फ़ुल्की बाद गप्पें हांकने के बाद दोनों सोने की तैयारी करने लगी और बैडरूम की लाइट बंद कर दी गई।
जैसे ही बैडरूम की लाइट बंद हुई मैंने तड़ाक से आँखें खोल ली और रिंकी को देखने लगा। रिंकी तब अपने बिस्तर पर लेटने की तैयारी
कर रही थी और अपने बाल बाँध रही थी।
मैंने चुपके से अपनी दाईं बाजु रिंकी के बिस्तर पर तकिये से ज़रा सी नीचे दूर तक फैला दी।
रिंकी चादर ऊपर खींच कर जैसे ही अपने बिस्तर पर लेटी, मेरी बाजु उसकी गर्दन के नीचे से उसके परले कंधे तक पहुँच गई। उसने
अपने हाथ से अपने दाएं कंधे के पास टटोल कर देखा तो मेरा दायां हाथ उसके हाथ में आ गया।
जैसे ही रिंकी के हाथ की उंगलियां मेरे हाथ से टच हुई, मैंने उस का हाथ जोर से पकड़ लिया।
पहले तो रिंकी ने दो-चार पल अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन जल्दी ही मेरा हाथ कस के पकड़ लिया।
मुझे तो दो जहान् की खुशियां मिल गई जैसे… मानो सारी कायनात ठहर गई हो!
मेरा दिल मेरे सीने में धाड़-धाड़ बज़ रहा था और मैं अपने ही दिल की धड़कन बड़ी साफ़-साफ़ सुन रहा था। पता नहीं ऐसे दो मिनट
बीते के दो घंटे… कुछ याद नहीं।
फिर मैंने रिंकी की ओर करवट ली और अपना बायां हाथ रिंकी के बाएं उरोज़ पर रख दिया, रिंकी ने मेरा वो हाथ फ़ौरन परे झटक दिया
और अपना सर बायें से दायें हिला कर जैसे अपना एतराज़ जताया लेकिन मैंने दोबारा अपना हाथ उसके बायें उरोज़ पर रख दिया।
रिंकी ने दोबारा मेरा हाथ अपने उरोज़ पर से उठाना चाहा लेकिन इस बार मेरा हाथ ना उठाने का इरादा पक्का था, दो एक मिनट की
असफ़ल कोशिश करने के बाद रिंकी ने अपना हाथ मेरे हाथ से उठा लिया और जैसे मुझे मनमानी करने की इज़ाज़त दे दी।
मैं अँधेरे में रिंकी के उरोज़ की नरमी और गर्मी दोनों को अपने हाथ में महसूस कर रहा था।
धीरे धीरे मैंने अपनी उँगलियों को रिंकी के उरोज़ पर ज़ुम्बिश देनी शुरू की। रिंकी का उरोज़ बहुत नर्म सा था, मैं उस पर बहुत नरमी से
उंगलियां चला रहा था।
अचानक एक जगह हल्की सी कुछ सख़्त सी मालूम पड़ी। हल्का सा टटोलने पर पता पड़ा कि यह उरोज़ का निप्पल है।
जैसे ही मेरा हाथ निप्पल को लगा, वो और ज़्यादा टाईट और बड़ा हो कर ख़डा हो गया। मैंने अपना हाथ रिंकी की चादर के अंदर डाल
कर, रिंकी की नाईट सूट का ऊपर वाला एक बटन खोल कर, ब्रा के अंदर से हौले से रिंकी के उरोज़ पर रखा तो रिंकी के पूरे ज़िस्म में
झुरझुरी की एक लहर सी दौड़ गई जिसे मैंने स्पष्टत महसूस किया।
रिंकी की गर्म तेज़ साँसें मैं अपनी कलाई पर महसूस कर रहा था। रिंकी के उरोज़ के कठोर निप्पल का स्पर्श मैं अपनी हथेली के ठीक
बीचों बीच महसूस कर पा रहा था।
धीरे से मैंने अपनी पाँचों उंगलियां उरोज़ के साथ साथ ऊपर उठानी शुरू की और अंत में निप्पल उँगलियों के बीच में आ गया जिसे मैंने
हलके से दबाया।

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